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Anant Chaturdashi 2022: आज अनंत चतुर्दशी को अनन्त भगवान की पूजा करके संकटों से होती है रक्षा

भाद्रपद मास के शुक्लपक्ष की चतुर्दशी अनन्त चतुर्दशी कहलाती है। इस दिन अनन्त भगवान की पूजा करके संकटों से रक्षा होती है। वही आज अनन्तसूत्र बांधा जाता है। कहा जाता है कि पाण्डव जुएं में अपना सारा राज-पाट हारकर वन में कष्ट भोग रहे थे, तब भगवान श्रीकृष्ण ने उन्हें अनन्तचतुर्दशी का व्रत करने की सलाह दी। धर्मराज युधिष्ठिर ने अपने भाइयों तथा द्रौपदी के साथ पूरे विधि-विधान से व्रत किया तथा अनन्तसूत्रधारण किया। अनन्तचतुर्दशी-व्रत के प्रभाव से पाण्डव  संकटों से मुक्त हो गए।व्रत-विधान-व्रतकर्ता स्नान करके व्रत का संकल्प करें। शास्त्रों में  व्रत का संकल्प एवं पूजन किसी पवित्र नदी या सरोवर के तट पर करने का विधान है। लेकिन ऐसा संभव न होने की स्थिति में घर में पूजागृह की स्वच्छ भूमि पर कलश स्थापित करें। कलश पर शेषनाग शैय्यापर लेटे भगवान विष्णु की मूर्ति  अथवा चित्र को रखें। उनके समक्ष चौदह ग्रंथियों (गांठों) से युक्त अनन्तसूत्र (डोरा) को रखें। इसके बाद “ॐ अनन्तायनम:” मंत्र से भगवान विष्णु और अनंतसूत्र की षोडशोपचार-विधि से पूजा करें। पूजनोपरांत अनन्तसूत्र को मंत्र पढ पुरुष अपने दाहिने हाथ और स्त्री बाएं हाथ में बांध लें।

अनंन्तसागर महासमुद्रे मग्नान्समभ्युद्धर वासुदेव।
अनंतरूपे विनियोजितात्माह्यनन्तरूपाय नमो नमस्ते॥

अनंतसूत्र बांध लेने के पश्चात किसी ब्राह्मण को नैवेद्य (भोग) में निवेदित पकवान देकर स्वयं सपरिवार प्रसाद ग्रहण करें। पूजा के बाद व्रत-कथा को पढें या सुनें।  अनन्त-व्रत के सविधि पालन से पाप नष्ट होते हैं तथा सुख-शांति प्राप्त होती है। कौण्डिन्यमुनि ने चौदह वर्ष तक अनन्त-व्रत का नियमपूर्वक पालन करके खोई हुई समृद्धि को पुन:प्राप्त कर लिया।*

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