तीसरे चरण में डिजिटल सक्षमता और जमीनी स्तर पर व्यवहार में सकारात्मक बदलाव पर रहेगा जोर
लखनऊ, 04-July-2026: बच्चों में कुपोषण की समस्या से निपटने के अपने प्रयासों को आगे बढ़ाते हुए, स्वास्थ्य और तंदुरुस्ती के क्षेत्र में काम करने वाली देश की अग्रणी कंपनी एम्वे इंडिया ने लखनऊ में अपने प्रमुख सामुदायिक पोषण शिक्षा कार्यक्रम ‘पावर ऑफ 5’ के दूसरे चरण का सफल समापन कर दिया है। इसके साथ ही कंपनी ने कार्यक्रम के तीसरे चरण की भी शुरुआत की है। चाइल्डफंड इंडिया के सहयोग से संचालित इस 12 माह के दूसरे चरण से 84 हजार से अधिक लोग लाभान्वित हुए। पहले चरण में रखी गई मजबूत नींव पर आगे बढ़ते हुए इस चरण में कुपोषण से जुड़े प्रमुख मानकों पर और बेहतर परिणाम देखने को मिले। अब तीसरे चरण के साथ यह कार्यक्रम एक नए पड़ाव में प्रवेश कर रहा है। इस चरण में डिजिटल तकनीक को पोषण शिक्षा और सामुदायिक स्वास्थ्य जागरूकता अभियानों से जोड़ा जाएगा, ताकि लोगों में पोषण के प्रति जागरूकता लगातार बढ़े और जमीनी स्तर पर स्वस्थ आदतों को अपनाने की दिशा में स्थायी व्यवहार परिवर्तन सुनिश्चित किया जा सके।
इस अवसर पर एम्वे इंडिया के मैनेजिंग डायरेक्टर श्री रजनीश चोपड़ा ने कहा, “एम्वे इंडिया का मानना है कि हर बच्चे के स्वस्थ और बेहतर भविष्य की शुरुआत सही पोषण से होती है। लोगों को बेहतर और स्वस्थ जीवन जीने में मदद करने के हमारे संकल्प के अनुरूप ‘पावर ऑफ 5’ कार्यक्रम जमीनी स्तर पर बच्चों में कुपोषण से निपटने की हमारी परिणाम-केंद्रित पहल है। लखनऊ में दूसरे चरण के नतीजे बताते हैं कि समुदाय की भागीदारी और लगातार किए गए प्रयास कितने प्रभावी साबित हो सकते हैं। इस दौरान कम वजन और उम्र के अनुसार कम लंबाई से प्रभावित आधे से अधिक बच्चे सामान्य श्रेणी में आ गए। साथ ही, परिवारों में साफ-सफाई और खान-पान से जुड़ी आदतों में भी उल्लेखनीय सुधार देखने को मिला। वर्ष 2024 में शुरू हुए इस कार्यक्रम से अब तक लखनऊ में 1.50 लाख से अधिक लोग लाभान्वित हो चुके हैं, जिनमें 14 हजार से ज्यादा बच्चे शामिल हैं।”
प्रोग्राम के तीसरे चरण के बारे में उन्होंने कहा, “लखनऊ में इस कार्यक्रम को अब तक जो सफलता मिली है और देशभर में 8.4 लाख से अधिक लोगों तक इसकी पहुंच इस बात का प्रमाण है कि समुदाय की भागीदारी से चलाए गए प्रयास लंबे समय तक असर छोड़ते हैं। तीसरे चरण में हम तकनीक को और प्रभावी ढंग से इस पहल से जोड़ रहे हैं। ऑडियो-वीडियो आधारित सामग्री के जरिए माताओं और बच्चों की देखभाल करने वालों तक पोषण, साफ-सफाई और शिशु आहार से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारी आसान भाषा में पहुंचाई जाएगी। सामुदायिक कार्यकर्ताओं को और बेहतर प्रशिक्षण दिया जाएगा, ताकि वे लोगों तक प्रभावी ढंग से स्वास्थ्य संबंधी जानकारी पहुंचा सकें। साथ ही, स्कूली बच्चों में पौष्टिक भोजन की आदतों को भी बढ़ावा दिया जाएगा। हमारा लक्ष्य इस पहल का दायरा बढ़ाते हुए समाज में स्थायी और सकारात्मक बदलाव लाना है।”
चाइल्डफंड इंडिया की डायरेक्टर – प्रोग्राम एंड इम्पैक्ट, डॉ. श्राबंती सेन ने कहा, “चाइल्डफंड इंडिया का मानना है कि हर बच्चे को स्वस्थ रहने, पर्याप्त पोषण पाने और अपनी पूरी क्षमता के साथ आगे बढ़ने का अवसर मिलना चाहिए। एम्वे इंडिया के सहयोग से चल रही इस पहल में डिजिटल तकनीक को प्रमुख आधार बनाया गया है, ताकि आंगनवाड़ी केंद्रों की सेवाएं और अधिक प्रभावी बन सकें तथा सभी तक बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं समान रूप से पहुंच सकें। इस परियोजना का उद्देश्य शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में प्रारंभिक बाल विकास, पोषण और स्वास्थ्य जागरूकता से जुड़ी कमियों को दूर करना है। डिजिटल टूल्स की मदद से आंगनवाड़ी और अन्य फ्रंटलाइन कार्यकर्ताओं को सशक्त बनाया जा रहा है, ताकि वे समय पर स्वास्थ्य, पोषण और शुरुआती शिक्षा से जुड़ी सेवाएं उपलब्ध करा सकें। आगे भी हम हर बच्चे और हर मां तक बेहतर देखभाल पहुंचाने के लिए प्रतिबद्ध हैं।”
लखनऊ में चलाए गए ‘पावर ऑफ 5′ कार्यक्रम के दूसरे चरण में पोषण शिक्षा के साथ-साथ साफ-सफाई के प्रति जागरूकता बढ़ाने और स्वस्थ आदतों को अपनाने पर विशेष जोर दिया गया। डेटा-आधारित कार्यप्रणाली के तहत एम्वे इंडिया और चाइल्डफंड इंडिया ने कम वजन, उम्र के अनुसार कम लंबाई और कमजोरी (वेस्टिंग) से प्रभावित 1,800 बच्चों की शुरुआत से लेकर कार्यक्रम के अंत तक नियमित निगरानी की और उनके स्वास्थ्य में आए बदलावों का आकलन किया।
इस पहल का असर सिर्फ बच्चों तक ही सीमित नहीं रहा, बल्कि परिवारों और समुदायों में भी सकारात्मक बदलाव देखने को मिले। बच्चों में भोजन से पहले और बाद में, शौच के बाद तथा बाहर खेलकर आने के बाद हाथ धोने जैसी अच्छी आदतों में उल्लेखनीय सुधार दर्ज किया गया। वहीं, दिन में तीन बार संतुलित भोजन करने वाले बच्चों का अनुपात 41 प्रतिशत से बढ़कर 60 प्रतिशत हो गया, जो परिवारों में स्वस्थ खान-पान की आदतों को अपनाने की दिशा में सकारात्मक बदलाव का संकेत है।
| मुख्य बातें– दूसरा चरण, पावर ऑफ 5 प्रोजेक्ट, लखनऊचाइल्डफंड इंडिया द्वारा संचालित कार्यक्रम मूल्यांकन अध्ययन पर आधारित | |
| अंतिम मूल्यांकन (एंडलाइन सर्वे): सैम्पल साइज – 1,800 बच्चे | |
| सामान्य श्रेणी में आए कुपोषित बच्चों का कुल प्रतिशत कम वजनउम्र के अनुसार कम लंबाई कमजोरी/दुबलापन | 52% 51% 14% |
| कुपोषित बच्चों के औसत हैज़र्ड रैंकिंग स्कोर^^ में आई कुल गिरावट^^ कुल हैज़र्ड रैंकिंग स्कोर की गणना अंडरवेट (कम वजन), स्टंटिंग (उम्र के अनुसार कम लंबाई) और वेस्टिंग (कमजोरी/दुबलापन) के औसत स्कोर के रूप में की जाती है। | (4.16 से 1.38) 67% |
| एंडलाइन सर्वे में 250 बच्चों और उनके अभिभावकों को शामिल किया गया। इसमें व्यवहार परिवर्तन और आईसीडीएस सेवाओं के प्रति जागरूकता का आकलन किया गया | |
| बच्चों में हाथ धोने की आदत में सुधार भोजन से पहले और बाद मेंशौच के बाद बाहर खेलने के बाद | 19% से 69% पहुंचा33% से 84% पहुंचा12% से 54% पहुंचा |
पार्टनर एनजीओ, चाइल्डफंड इंडिया द्वारा एंडलाइन अध्ययन, इसमें पावर ऑफ 5 न्यूट्रीशन शिक्षा कार्यक्रम के प्रभाव का आकलन किया गया।
इन सकारात्मक परिणामों को आगे बढ़ाते हुए, तीसरे चरण में स्थायी बदलाव सुनिश्चित करने के लिए कई स्तरों पर काम किया जाएगा। इस पहल के तहत 10 आंगनवाड़ी केंद्रों और 4 सरकारी स्कूलों को आवश्यक संसाधनों और डिजिटल सुविधाओं से सशक्त बनाया जाएगा। इससे 1,600 से अधिक बच्चों सहित लगभग 15,000 माताओं और देखभाल करने वालों को लाभ मिलने की उम्मीद है। इस चरण का मुख्य उद्देश्य तकनीक की मदद से पोषण संबंधी जानकारी को अधिक प्रभावी बनाना और स्वस्थ आदतों को बढ़ावा देना है।
इन आंगनवाड़ी केंद्रों और स्कूलों को ‘डिजिटल न्यूट्रिशन हब’ के रूप में विकसित किया जाएगा। ये मॉडल केंद्र दिखाएंगे कि पोषण ट्रैकर और एकीकृत बाल विकास सेवा (आईसीडीएस) के ई-लर्निंग मॉड्यूल जैसे डिजिटल टूल्स का उपयोग पोषण संबंधी जागरूकता बढ़ाने, बच्चों के विकास की नियमित निगरानी करने और डेटा प्रबंधन को अधिक प्रभावी बनाने में किस तरह किया जा सकता है।
वर्ष 2018 में शुरू हुई एम्वे इंडिया की ‘पावर ऑफ 5′ पहल से अब तक दिल्ली, सोहना, नूंह, मुंबई, चेन्नई, कोलकाता और लखनऊ सहित कई शहरों में 8.40 लाख से अधिक लोग लाभान्वित हो चुके हैं। इनमें 1.41 लाख से अधिक बच्चे शामिल हैं। एम्वे ग्लोबल के सहयोग से लखनऊ में शुरू किया गया तीसरा चरण इस बात का उदाहरण है कि विभिन्न क्षेत्रों के साझा प्रयास किस तरह दीर्घकालिक और सार्थक बदलाव ला सकते हैं। मापनीय परिणामों और स्थायी प्रभाव पर जोर देते हुए एम्वे इंडिया लोगों को बेहतर और स्वस्थ जीवन जीने में मदद करने के अपने संकल्प को लगातार आगे बढ़ा रहा है।
