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अरविंद केजरीवाल की राह पर निकले अमिताभ ठाकुर को मिलेगी कुर्सी या जेल की कोठरी


अरविंद केजरीवाल की राह पर निकले अमिताभ ठाकुर को मिलेगी कुर्सी या जेल की कोठरी

लखनऊ। सरकारी नौकरी छोडक़र राजनीति में उतरे अरविंद केजरीवाल परम्परागत व्यवस्था से इत्तेफाक न रखने वालों के लिए नजीर बन चुके हैं। सरकारी नौकरी खासकर प्रशासनिक सेवा में रहते हुए खुद को बंधा हुआ महसूस करने और समाज को दिशा देने की फितरत रखने वाले राजनीति को ही अपना कॅरियर चुनना पसंद कर रहे हैं।

कुछ इसी राह पर चलने को पूर्व आईपीएस अमिताभ ठाकुर ने भी तैयार तो की पर फिलहाल स्थिति सिर मुंडाते ओले पडऩे सी है। अमिताभ ठाकुर ने अभी राजनीतिक दल बनाकर यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ से चुनाव में मोर्चा लेने की घोषणा की ही थी कि, एक अपराधिक मामले में लखनऊ पुलिस ने उन्हें गिरफ्तार कर लिया।      

याद कीजिए, पूर्व में सीनियर प्रशासनिक अधिकारी रहे अरविंद केजरीवाल  (दिल्ली के मौजूदा मुख्यमंत्री)ने दस बरस पहले शीला दीक्षित सरकार पर अनियमितताओं के संजीदा आरोप लगाकर अपने पाूलिअिकल कॅरियर की शुरुआत की थी।

तत्तकालीन केंद्र सरकार पर हमलावर रह कर उन्होंने  लोकपाल मसले पर बकायदा आंदोलन चलाकर भारी जनसमर्थन पाया और 2012 में आम आदमी पार्टी का गठन कर दिल्ली की कुर्सी की पर काबिज हुए। अब तक वह तीन दफा दिल्ली के सीएम बन चुके हैं।

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इधर यूपी की राजधानी लखनऊ में एक और पूर्व सीनियर नौकरशाह अमिताभ ठाकुर भी राज्य सरकार पर मुखर हैं। ठाकुर ने सीएम योगी आदित्यनाथ के के मुकाबिल गोरखपुर से चुनाव मैदान में उतरने की घोषणा भी की है। ऐसे में सवाल यह है कि क्या वह यूपी में अरविंद केजरीवाल की ही तरह सफलता पा सकेंगे। क्या उनको गिरफ्तार करने का तरीका उनकी राजनीतिक पारी का सफल होने या असफल होने का मोड़ साबित होगा।

इसे संयोग कहें या राजनीतिक साजिश? अमिताभ ठाकुर की अरेस्टिंग उसी दिन हुई जिस दिन उन्होंने अपनी नयी राजनीतिक पार्टी के गठन की घोषणा कर लोगों से जुटने-जुडऩे का आह्वान किया। यह भी कह गये कि वह मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के ही मुकाबले चुनाव लड़ेंगे। अब ऐसे में अमिताभ ठाकुर की अरेस्टिंग पर प्रश्र उठने स्वाभाविक हैं।

अमिताभ ठाकुर की पत्नी नूतन ठाकुर मीडिया से मुखातिब हो कहतीं हैं कि, उनके हसबैंड को इसलिए परेशान किया जा रहा है क्योंकि उन्होंने सीएम योगी आदित्यनाथ को चुनाव मैदान में ललकारा है। बहरहाल यहां तो मसला अपराधिक कृत्य का है सो, इसके तर्क में उनका पक्ष है कि, पीडि़ता के दर्ज बयान में एक मौजूदा जज के साथ कुछ अन्य पुलिस अफसरानों के ऊपर भी आरोप हैं, पर पुलिस ने उनपर कोई एक्शन नहीं ले रही।

गौर हो कि, संबधित अपराधिक केस की पीडि़ता ने बीती 16 अगस्त को सुप्रीम कोर्ट के समक्ष आत्मदाह से पहले सोशल मीडिया पर लाइव होकर अपने केस मसले में अमिताभ ठाकुर समेत बनारस के तत्कालीन एसएसपी अमित पाठक, एक न्यायाधीश, सीनियर अधिकारी वीपी सिंह, सीओ अमरेश सिंह, थाना अधिकारी संजय राय और उनके बेटे विवेक राय का का जिक्र किया था।

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नूतन ठाकुर के मुताबिक, बीते कई दिनों से उनके घर की घेराबंदी चल रही थी। हर मिलने5जुलने वालों पर नजर रखी जा रही थी। नूतन ठाकुर का दावा है कि उनके परिवार ने आजीवन ईमानदारी के साथ अपने कर्तव्य का पालन किया और आगे इस संघर्ष को जारी रखेंगे। 

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