अमित बिश्नोई
हैडलाइन से आप सोच रहे होंगे कि इसमें कौन सी नई बात है, ये तो तब से चला आ रहा है जबसे पाकिस्तान वजूद में आया, अमेरिका के आगे तो वो हमेशा घुटने टेकता रहा है, उसकी औकात दिखाता रहा है लेकिन यहाँ मैं जिस घुटने टेकने, या औकात दिखाने की बात कर रहा हूँ वो किसी शक्तिशाली देश के आगे किसी खस्ताहाल देश का नतमस्तक होना नहीं है यहाँ पर क्रिकेट मैच की बात कर रहा हूँ, टी 20 विश्व कप की बात कर रहा हूँ जहाँ पर एक शक्तिशाली कही जाने वाली टीम पाकिस्तान के एक अदना और अनजान सी टीम के आगे घुटने टेकने की बात कर रहा हूँ। जी हाँ, बिग स्टोरी ये है कि कल रात उस अमेरिकी टीम ने पूर्व विश्व चैंपियन पाकिस्तान को पराजित कर दिया जिसे इस विश्व कप में खेलने का मौका सिर्फ इसलिए मिल पाया क्योंकि वो टूर्नामेंट की सह मेज़बानी कर रहा है. दुनिया के कई देशों के खिलाडियों को जमा करके बनाई गयी इस टीम जिसका नेतृत्व एक भारतवंशी कर रहा है, उसने बाबर सेना को पटकनी देकर इतिहास रच दिया।
यूएसए की टीम जितनी भी तारीफ की जाय कम है, पाकिस्तान के खिलाफ वो सच में जीत के हक़दार थे, अगर उन्हें जीत न मिलती तो ये एक तरह से उनके लिए अन्याय जैसी बात होती। मोनाक पटेल की कप्तानी वाली इस टीम में जिसमें आधे खिलाड़ी तो भारतवंशी हैं और इनमें से तो कई ने तो अपनी क्रिकेट का क ख ग घ भारत में ही सीखा है, राज्यों की टीम में खेले, भारत का भी नेतृत्व किया, ने पाकिस्तान की बड़बोली टीम को धूल चटा दी. अगर हम ये कहीं कि पाकिस्तान अमेरिका से नहीं भारतवंशियों से हारा है तो कोई गलत बात नहीं होगी। कल के मैच में पाकिस्तान के खिलाफ पांच भारतवंशी खेल रहे थे, जिनमें कप्तान मोनाक पटेल, सौरभ नेत्रावलकर, नितीश कुमार, हरदीप सिंह और जसदीप सिंह शामिल थे और इन सभी खिलाडियों ने मिलकर पाकिस्तान टीम को पटकनी देने में महत्वपूर्ण किरदार निभाया।
पहले जब पाकिस्तान की टीम बल्लेबाज़ी कर रही थी तब सौरभ नेत्रवालकर, हरदीप सिंह और जसदीप सिंह ने शानदार और सधी हुई गेंदबाज़ी करके पाकिस्तान के बल्लेबाज़ों को न सिर्फ बाँध दिया बल्कि पावर प्ले के दौरान रन्स भी नहीं बनाने दिए और तीन विकेट भी निकाल दिए. ये तीन खिलाडी थे मोहम्मद रिज़वान, उस्मान खान और फखर ज़मान, इनकी शानदार गेंदबाज़ी का आलम ये था कि टी 20 क्रिकेट में सबसे ज़्यादा रन बनाने वाले बाबर आज़म को पहले सात रन बनाने में 21 गेंदें खेलनी पड़ीं, खासकर नेत्रावलकर ने जिस तरह की गेंदबाज़ी की है उसकी जितनी भी तारीफ की जाय कम है, मैच में तो उन्होंने अपने चार शानदार ओवर डाले ही, जिसमें सिर्फ 18 रन देकर रिज़वान और इफ्तिखार के विकेट निकाले, इसके बाद सुपर ओवर में भी उन्होंने सुपर ओवर डाला और पाकिस्तान को लक्ष्य तक नहीं पहुँचने दिया।
इसके बाद जब बल्लेबाज़ी का नंबर आया तो कप्तान मोनाक पटेल सबसे आगे नेतृत्व करते हुए दिखाई और पाकिस्तान की कथित वर्ल्ड क्लास गेंदबाज़ी के आगे शानदार पचासा जड़कर जीत की नींव रखी और इस नीव पर नितीश कुमार ने ईमारत खड़ी की, हालाँकि वो टीम को उस ईमारत के अंदर तक नहीं ले जा सके और मैच को सुपर ओवर में जाना पड़ा फिर भी अंतिम ओवर में हारिस रउफ की तेज़ रफ़्तार गेंदों पर 15 रन बनाना कोई मामूली बात नहीं कही जा सकती। दरअसल मैच अपने नियत समय में ख़त्म हो जाना चाहिए था और यूएसए को जीत मिल जानी चाहिए थी लेकिन अंतिम चार ओवरों में पाकिस्तान ने कुछ अच्छे ओवर डाले जिसकी वजह मैच फंस गया, मगर अंततः वही नितीश जो फंसे हुए दिख रहे थे, टीम की नैया पार लगाने में कामयाब हो गए, वैसे भी नितीश नाम के लोगों के सितारे आजकल बुलंद चल रहे हैं.
पाकिस्तान की क्या बात करें, बस इतना ही कहा जा सकता है कि पूरी टीम मैच हारने के लिए ज़ोर लगाती हुई नज़र आ रही थी, चाहे बल्लेबाज़ी हो, गेंदबाज़ी हो या फिर क्षेत्ररक्षण और या फिर कप्तानी, हर क्षेत्र में पूरी तरह भटकी हुई दिख रही थी, इसलिए मैंने कहा कि यूएसए की टीम को अगर जीत न मिलती तो ये उसके लिए अन्याय जैसे बात होती। मेरे नज़रिये से तो पाकिस्तान की टीम इस विश्व कप में कोई उम्मीद लेकर नहीं पहुंची है, टीम के खिलाडियों पर ही अगर नज़र डालिये तो निराशा झलकती है. मोहम्मद आमिर और इमाद वसीम की वापसी और आज़म खान का टीम में शामिल होना बताता है कि पूरी टीम मनमर्ज़ी वाली है। इसपर ज़्यादा कुछ बात करना समय की बर्बादी ही होगी, बस इतना कह जा सकता है कि सुपर 8 में पाकिस्तान का पहुंचना एक चमत्कार ही कहा जाएगा। आखिर में यही कहूंगा कि एक अदना सी टीम ने पाकिस्तान को उसकी औकात दिखा दी.
