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Gyanvapi Case: सर्वे पर लगी रोक गुरुवार तक बढ़ी, कल होगी हाईकोर्ट में मामले पर सुनवाई

suprim court

Gyanwapi Case: आज इलाहाबाद हाईकोर्ट में मुख्य न्यायमूर्ति प्रीतिंकर दिवाकर ने ज्ञानवापी परिसर में सर्वे कराए जाने के मामले में दाखिल अंजुमन इंतजामिया कमेटी की याचिका पर सुनवाई की। वहीं हाईकोर्ट ने सर्वे पर लगी रोक को गुरुवार तक बढ़ा दिया है। मामले में कल फिर हाईकोर्ट में सुनवाई होगी। लेकिन हाईकोर्ट ने वहीं दूसरी तरफ ये भी कहा कि अगर ज्ञानवापी परिसर को बिना नुकसान पहुंचाए सर्वे हो सकता है तो वो 31 जुलाई तक पूरा किया जाए। हालांकि इस निर्णय पर अमल कल की सुनवाई के बाद ही होगा। इसके बाद एएसआई के वैज्ञानिक को तलब किया। एएसआई के वैज्ञानिकों को कोर्ट ने ढांचे को बिना नुकसान पहुंचाए 31 जुलाई 2023 तक सर्वे पूरा करने का आदेश दिया। हाईकोर्ट इलाहाबाद की मुख्य न्यायमूर्ति प्रीतिंकर दिवाकर ने ज्ञानवापी परिसर में सर्वे कराए जाने के मामले में दाखिल अंजुमन इंतजामिया कमेटी की याचिका पर सुनवाई करते हुए एएसआई के वैज्ञानिक को तलब किया। जिसके बाद वैज्ञानिक आलोक त्रिपाठी कोर्ट में पेश हुए। आलोक त्रिपाठी ने कोर्ट को बताया जीपीआर विधि और फोटोग्राफी विधि से कैसे सर्वेक्षण होगा। कोर्ट ने एएसआई से यह स्पष्टीकरण चाहा कि सर्वे के दौरान कोई क्षति होगी। कोर्ट इस मामले में एएसआई से उस मैथेड को जानना चाहती थी। जिसके जरिए एएसआई सर्वे कर रही है। कोर्ट ने सर्वे सिस्टम का डेमो भी देखा।

सुनवाई के दौरान मस्जिद पक्ष की तरफ से कहा

इसके पहले सुनवाई के दौरान मस्जिद पक्ष की तरफ से कहा गया कि सर्वे से संरचना को क्षति हो सकती है। जिला जज को सर्वे का अधिकार नही है। यह आदेश गलत है। जवाब में मंदिर पक्ष की तरफ से जवाब दिया कि सर्वे के बाद मंदिर के स्ट्रक्चर का सही पता चलेगा। एएसआई दो तकनीकों के माध्यम से सर्वे कर रही है। इसमें फोटोग्राफी, इमैजिंग से होगी। इसमें किसी तरह की क्षति नहीं होगी। इस पर कोर्ट ने सर्वे का डेमो देखा।

1992 अयोध्या में हुए विध्वंस का अनुभव नहीं भुलाया जा सकता

इसके पूर्व हिंदू पक्ष के वकील ने कहा वैज्ञानिक सर्वेक्षण से स्थापित ढांचे को नुकसान नहीं होगा। मुस्लिम पक्षकार ने तर्क दिया कि कौन नुकसान न होने की गारंटी लेगा। 1992 अयोध्या में हुए विध्वंस का अनुभव नहीं भुलाया जा सकता। ज्ञानवापी मामले की सुनवाई के लिए मुख्य न्यायाधीश की कोर्ट में बड़ी संख्या में अधिवक्तागण मौजूद थे। इस मामले आज शाम तक फैसला आ गया। मुस्लिम पक्षकार का आरोप है कि निचली अदालत ने वैज्ञानिक सर्वे का तार्किक कारण अपने आदेश में अंकित नहीं किया। निचली अदालत ने अपने आदेश में उन परिस्थितियों का उल्लेख नहीं किया। जिसमें वैज्ञानिक सर्वे अनिवार्य है।

मुस्लिम पक्ष की तरफ से बहस करते हुए अधिवक्ता पुनीत गुप्ता ने कहा कि सिविल वाद में साक्ष्य प्रक्रिया पूरी हुए बिना वैज्ञानिक सर्वे करना है। सिविल वाद में स्टेज पर वैज्ञानिक सर्वे का आदेश जल्दबाजी में दिया है। हाईकोर्ट ने केंद्र सरकार के सॉलिसिटर जनरल से पूछा कि एएसआई ज्ञानवापी में क्या करेगी। यह क्यों वहां जा रही है। कोर्ट ने सॉलिसिटर जनरल शशि प्रकाश सिंह से पूछा किस तरह ASI सर्वेक्षण करेगी। खुदाई करेंगे या नहीं।

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