Gyanvapi ASI Survey Case: वाराणसी में ज्ञानवापी परिसर का ASI सर्वे होगा। आज इलाहाबाद हाईकोर्ट ने ज्ञानवापी मस्जिद में ASI सर्वे पर अपना फैसला सुना दिया। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने मामले में भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण को ASI सर्वेक्षण करने की अनुमति दी है। हाईकोर्ट के इस फैसले से मुस्लिम पक्ष को बड़ा झटका लगा है। ज्ञानवापी के ASI वैज्ञानिक सर्वेक्षण के मामले में मुस्लिम पक्ष को हाईकोर्ट के इस फैसले से आज बड़ा झटका लगा है। इलाहाबाद हाईकोर्ट खंडपीठ ने भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण ASI पर रोक लगाने से इनकार कर दिया है। हाईकोर्ट की अदालत ने अपने फैसले में कहा कि ASI सर्वे से किसी को नुकसान नहीं है।
ASI के सर्वे को हाईकोर्ट में मंजूरी
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने अपने फैसले में भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण को वाराणसी में ज्ञानवापी मस्जिद परिसर का ASI सर्वेक्षण करने की अनुमति दी है। इस मामले में सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर हाईकोर्ट में तीन दिन सुनवाई हुई थी। सुनवाई के बाद ASI के सर्वे को हाईकोर्ट में मंजूरी दे दी गई है।
वाराणसी जिला जज द्वारा ज्ञानवापी सर्वेक्षण की अनुमति देने के आदेश को अंजुमन इंतजामिया मसाजिद ने पहले सुप्रीम कोर्ट में और उसके निर्देश पर हाईकोर्ट में चुनौती दी थी। मुस्लिम पक्ष की तरफ से दाखिल याचिका पर इलाहाबाद हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश प्रीतिंकर दिवाकर की एकल पीठ ने इस मामले में सुनवाई हुई थी।
मूल ढांचे को नुकसान पहुंचनें की बात
हाईकोर्ट में दलील देते हुए मुस्लिम पक्षकार के वकील एसएफए नकवी ने अदालती आदेश के जरिए ज्ञानवापी के ASI वैज्ञानिक सर्वेक्षण से ज्ञानवापी के मूल ढांचे को नुकसान पहुंचनें की बात कही थी। उन्होंने कोर्ट में कहा था कि अयोध्या के बाबरी मस्जिद विध्वंस का दंश पूरे देश ने झेला है। सिविल वाद में पोषणीयता का बिंदु तय किए बिना जल्दबाजी में ASI सर्वेक्षण और ज्ञानवापी खोदाई का फैसला घातक होगा।
हालांकि ASI ने मुस्लिम पक्ष की दलील को खारिज करते हुए कहा था कि ASI सर्वेक्षण के लिए जो तकनीक अपनाई गई है।
उससे ज्ञानवापी के मूल संरचना को खरोंच तक नहीं आयेगी। हिंदू पक्ष के वकील विष्णु शंकर जैन और सौरभ तिवारी का कहना था कि ASI वैज्ञानिक सर्वेक्षण के माध्यम से ज्ञानवापी की सच्चाई सामने आएगी। हाईकोर्ट में सुनवाई के दौरान कोर्ट में मौजूद रहे यूपी के महाधिवक्ता अजय कुमार मिश्र ने कहा था कि याचिका में राज्य सरकार पक्षकार तो नहीं हैं, लेकिन ASI सर्वेक्षण होने की दशा में Law and order की जिम्मेदारी के लिए UP सरकार तैयार है।
