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उत्तराखंड के दलित वोटरों पर है सभी पार्टियों की निगाह


उत्तराखंड के दलित वोटरों पर है सभी पार्टियों की निगाह

देहरादून। उत्तराखंड के दलित वोटरों पर सभी राजनीतिक दलों की निगाह बनी हुई हैं। दलित वोटरों को अपने पाले में खींचने का कोई भी सिरा यह राजनीतिक दल छोड़ने को राजी नहीं है। एक ओर जहां भारतीय जनता पार्टी खुद को दलित हितैषी साबित करने में जुटी है। वहीं दूसरी ओर कांग्रेस ने भी गांधी जयंती के अवसर पर दलितों के 700 गांवों में कांग्रेस नेताओं के रहने और दलितों के यहां भोजन करने का कार्यक्रम बनाया है।

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उत्तराखंड के राजनीति में शीर्ष पर रहने के लिये दलित वोटरों का समर्थन बेहद आवश्यक है। वजह स्पष्ट है कि उत्तराखंड के वोटर्स में से 18 प्रतिशत संख्या दलित मतदाताओं की है। यह संख्या किसी भी चुनाव को हार-जीत में बदलने के लिये काफी है। पंजाब में दलित नेता चरणजीत सिंह चन्नी को मुख्यमंत्री बनाये जाने के बाद पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत उत्तराखंड में भी दलित सीएम बनाये जाने की इच्छा जता कर दलित राजनीति को हवा दे चुके हैं। अब कांग्रेस पार्टी ने गांधी जयंती के अवसर पर 700 गांवों में कांग्रेसी नेताओं के दो दिन तक रूकने और दलित परिवारों के साथ खाना खाने का कार्यक्रम बनाया है।

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दलित वोटरों को साधने के लिये कांग्रेस की यह रणनीति आगामी विधानसभा चुनाव में उसके लिये कितना फायदेमंद होगी इस बारे में कुछ कहना तो जल्दबाजी होगी। लेकिन भाजपा ने कांग्रेस के इस कार्यक्रम पर सवाल जरूर उठा दिये हैं। भाजपा का कहना है कि कांग्रेस ने दलित समुदाय के लिये कुछ नहीं किया, अब इस तरह के कार्यक्रम आयोजित करने से दलित झांसे में नहीं आयेंगे। भाजपा की ओर से कहा गया कि भाजपा के वरिष्ठ नेता कहीं भी दौरे पर जाते हैं तो अक्सर दलित परिवार के घर जाकर ही भोजन करते हैं और पार्टी के लिये यह कोई नयी बात नहीं है।

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