ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड ने अपने एक प्रेस बयान में मुसलमानों से अपील की है कि अगर हैसियत है तो क़ुर्बानी ज़रूर कराये लेकिन इस बात का पूरा ख़याल रखें क़ुरबानी के दौरान कुछ ऐसा न करें कि जिससे दूसरे धर्म के लोगों विशेषकर हिन्दू भाइयों को कोई परेशानी हो.
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बोर्ड के महासचिव मौलाना खालिद सैफुल्ला रमानी ने कहा कि ईद-उल-अज़हा मुसलमानों का एक बहुत ही महत्वपूर्ण त्योहार है, हमें अल्लाह के दो पैग़ंबरों हजरत इब्राहिम और हज़रत इस्माइल की याद दिलाता है और हमें इस तथ्य की ओर आकर्षित करता है कि हम अल्लाह के लिए किसी भी तरह के बलिदान के लिए तैयार हैं और तौहीद के सिद्धांत पर कायम हैं।
उन्होंने कहा कि इस मौके पर जानवरों की कुर्बानी की जाती है। शरीयत का ये हुक्म सिर्फ उन लोगों के लिए है जो पैसे वाले हैं ,दुनिया के अन्य धर्मों में भी जानवरों की क़ुरबानी की अवधारणा है, लेकिन क़ुरबानी करते या कराते समय यह महत्वपूर्ण है कि हम ऐसा कुछ भी न करें जिससे दूसरे भाइयों के दिल को ठेस पहुंचे, अम्न और भाईचारे को नुकसान पहुंचे।
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बोर्ड के बयान में कहा गया है कि गंदगी फैलाना, जानवर के अवशेष सड़क या बस्तियों में फेंकना, ये सभी चीजें शरीयत के खिलाफ हैं और नैतिकता व कानून के खिलाफ भी. समाज को बीमारियों से बचाना हमारा दायित्व है, इसलिए सरकार ने जानवरों के अवशेष फेंकने के लिए जो जगह तय कर रखी है, उसे वहीं पर डंप किया जाए, साफ-सफाई और भाईचारा बनाए रखा जाए.
