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ब्लैक फंगस के मरीज मिलने पर प्रयागराज में अलर्ट


ब्लैक फंगस के मरीज मिलने पर प्रयागराज में अलर्ट

एसआरएन अस्पताल में भर्ती कोरोना संक्रमित में मिले लक्षण
अन्य गंभीर मरीजों की भी कराई जा रही है आवश्यक जांच

प्रयागराज। काफी समय से कोरोना संक्रमण से जुझ रहे प्रयागराज पर अब म्यूकोरमाइकोसिस (ब्लैक फंगस इंफेक्शन) का खतरा मंडरा रहा है। जिले के एसआरएन अस्पताल में भर्ती एक कोरोना संक्रमित मरीज में ब्लैक फंगस इंफेक्शन के लक्षण दिखने के बाद स्वास्थ विभाग में हड़कंप मच गया। मरीज को अन्य मरीजों से अलग कर आवश्यक जांच कराई जा रही है। ब्लैक फंगस इंफेक्शन को लेकर अलर्ट जारी करने के बाद अस्पताल में भर्ती अन्य गंभीर रोगियों में भी ब्लैक फंगस इंफेक्शन की जांच की जा रही है।

कोरोना संक्रमित मरीजों के ब्लैक फंगस इंफेक्शन से प्रभावित होने के अनेक मामले सामने आये हैं। देश के विभिन्न राज्यों से ब्लैक फंगस इंफेक्शन के मरीज देखने को मिल रहे हैं। काफी समय तक कोरोना संक्रमण से जुझने के बाद प्रयागराज को थोड़ी राहत मिलनी शुरू हुई थी कि यहां भी कोरोना मरीज में ब्लैक फंगस इंफेक्शन के लक्षण दिखने से स्वास्थ विभाग की चिंता बढ़ गयी हैं। जिले के एसआरएन अस्पताल के कोविड वार्ड में भर्ती कोरोना मरीज में ब्लैक फंगस के लक्षण दिखाई देने के बाद अलर्ट जारी कर दिया गया है। अन्य गंभीर रोगियों में भी ब्लैक फंगस की जांच की जा रही है।

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कोरोना संक्रमितों और पोस्ट कोविड मरीजों (संक्रमणमुक्त) में ब्लैक फंगस का खतरा ज्यादा होने के बारे में आईसीएमआर ने भी गाइड लाइन जारी कर सचेत किया है। विशेषज्ञों के मुताबिक कोरोना व अन्य गंभीर रोगों से प्रभावित मरीज जिनके शरीर की प्रतिरोधक क्षमता कम हो गयी हो उनके लिये ब्लैक फंगस इंफेक्शन खतरनाक है। डायबिटीज का रोगी होने या शरीर में शुगर लेवल बढ़ने पर ब्लैक फंगस इंफेक्शन से प्रभावित होने की आशंका अधिक होती है। कई मामलों मंे यह मरीज के लिये जानलेवा भी साबित हो सकता है।

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ब्लैक फंगस इंफेक्शन मरीजों की आंखोें की रोेशनी छीनने के अलावा उनके दिमाग, फेेफड़े या त्वचा को भी प्रभावित कर सकता है। ब्लैक फंगस इंफेक्शन से प्रभावित व्यक्ति को दांत में दर्द होना, दांत का टूटना, जबड़ों में दर्द रहना, आंखें लाल और पलकों पर सूजन दिखना, आंखों में दर्द के साथ धुंधला या दोहरा दिखाई देना, सीने में दर्द और सांस लेने में परेशानी होना, नाक के पास लालिमा हो जाना जैसे लक्षण देखने को मिलते हैं। समय से उपचार न होने पर मरीज के जबड़े और नाक की हड्डी गलने के मामले भी सामने आ रहे हैं।

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