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कुर्मी वोट बैंक पर अब अखिलेश की नजर! बैठक की ये तस्वीर कर रही इसकी तस्दीक


कुर्मी वोट बैंक पर अब अखिलेश की नजर! बैठक की ये तस्वीर कर रही इसकी तस्दीक

लखनऊः यूपी विधानसभा चुनाव के नतीजे कई मायने में भविष्य की राजनीति को लेकर काफी अहम साबित होने वाले हैं और यही कारण है कि यूपी के चुनावी समर में कूदे सभी राजनीतिक दल वोटों के गणित को साधने के लिए कोई कोर कसर बाकी नहीं छोड़ रहे हैं। समाजवादी पार्टी ने बीजेपी के कोर वोटरों में सेंधमारी करने लिए बीजेपी के ही कई बड़े नेताओं को अपने पाले में करने का खेल शुरू कर दिया है और बीजेपी के कई नेता समाजवादी पार्टी का दामन थाम भी चुके हैं। इन सबके बीच बुधवार को अपने सहयोगी दलों के साथ बैठक के दौरान अखिलेश यादव ने कृष्णा पटेल को मुख्य सीट दी और खुद सहयोगियों के साथ वाली सीट पर बैठे रहे। ऐसे करके अखिलेश यादव ने एक तीर से कई निशाने साधे हैं।

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ओबीसी में सबसे बड़ा समुदाय कुर्मी समाज

दरअसल यूपी में जातिगत आधार पर देखें तो यादव के बाद ओबीसी में सबसे बड़ा समुदाय कुर्मी समाज का है। सूबे में कुर्मी वोटर लगभग 6 फीसदी है, लेकिन 16 जिलों में कुर्मी और पटेल वोट बैंक छह से 12 फीसदी से ज्यादा है। इनमें मिर्जापुर, बरेली, सोनभद्र, जालौन, उन्नाव, प्रतापगढ़, फतेहपुर, कौशांबी, सीतापुर, इलाहाबाद, बहराइच, बलरामपुर, श्रावस्ती और सिद्धार्थनगर, बस्ती जिले शामिल हैं। यूपी की 48 से ज्यादा विधानसभा सीटों पर कुर्मी वोटर जीतने या फिर किसी को भी जिताने की ताकत रखते हैं।

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ओबीसी वोटों में सपा कर पाएगी सेंधमारी ?

पिछले 2017 के विधानसभा चुनाव में बीजेपी अनुप्रिया पटेल की अपना दल (एस) के साथ गठबंधन कर कुर्मी समाज के वोटों को हासिल करने में कामयाब रही थी। कुर्मी वोटों की सियासी ताकत को देखते हुए सपा ने भी केंद्रीय मंत्री अनुप्रिया पटेल की मां कृष्णा पटेल की अपना दल के साथ गठबंधन किया है। इसके अलावा अखिलेश यादव ने प्रदेश अध्यक्ष नरेश उत्तम को बना रखा है, जो कुर्मी समुदाय से आते हैं। वहीं कुर्मी नेता लालजी वर्मा, बालकुमार पटेल सहित कई बड़े कुर्मा नेताओं को भी अपने पाले में ले लिया है। अब देखना ये होगा कि ओबीसी वोटों में सपा क्या सेंधमारी कर पाती है।

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