राजनीति बड़ी बुरी चीज़ है, दिन कैसे बदलते हैं, हालात कैसे बदलते हैं, बिलकुल मौसम की तरह, कभी बारिश तो कभी धूप। कुछ महीनों तक जिस व्यक्ति को अखिलेश यादव ने सारथी बनाया था आज उससे रथ ही छीन लिया। राजनीति की भाषा में इसे पैदल करना कहते हैं। जी हाँ बात हो रही समाजवादी पार्टी के सहयोगी रहे महान दल के केशव देव मौर्या की जिनसे अखिलेश यादव ने वह फार्च्यून गाड़ी वापस ले ली है जो उन्होंने विधानसभा चुनाव के समय उन्हें अपना सारथी बनाने के समय तोहफे में दी थी।
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दरअसल महान दल के प्रमुख केशवदेव मौर्या ने सपा गठबंधन में अपनी अनदेखी से निराश होकर गठबंधन से नाता तोड़ने का एलान कर दिया था। उन्होंने कहा था कि अखिलेश यादव को अब महान दल की ज़रुरत नहीं, केशवदेव मौर्या ने कहा था कि अखिलेश तो अब उनका पहने भी नहीं उठाते, इसलिए मैं गठबंधन से पार्टी को अलग हो रहा हूँ। बता दें कि विधानसभा चुनाव में अखिलेश ने महान दल से केशवदेव मौर्या के बेटे और पत्नी को साइकिल के चुनाव चिन्ह पर चुनाव लड़वाया था लेकिन दोनों ही सीटों पर हार का सामना करना पड़ा था। केशव देव चाहते थे कि दोनों में से किसी एक को गठबंधन की ओर विधान परिषद् भेजा जाय लेकिन बात नहीं तो गठबंधन से अलग हो गए।
अब जब गठबंधन से अलग हो गए तो अखिलेश यादव ने उनसे वह फॉर्चूनर गाड़ी भी वापस मांग ली जो चुनाव के समय उन्हें उपहार स्वरुप दी थी। इसे कहते हैं राजनीती में कोई किसी का सगा नहीं, केशवदेव से अखिलेश को कुछ हासिल होने वाला नहीं, चुनाव में भी महान दल का वोट सपा में ट्रांसफर नहीं हुआ था, जिससे खटास तो पहले ही हो गयी थी जो बढ़कर यहाँ तक पहुँच गयी।
