अखिलेश यादव और आज़म खान के बीच नाराज़गी की बातें जग ज़ाहिर हो चुकी हैं, सुप्रीम कोर्ट से मिली अंतरिम ज़मानत मिलने के बाद 27 महीनों बाद जेल से बाहर आये आज़म खान अपने व्यंग के बाण चला रहे हैं. आज़म और अखिलेश के बीच बढ़ रही नाराज़गी को दूर करने के लिए तरह तरह के फॉर्मूले सामने आ रहे हैं. एक फार्मूला यह है कि इस मामले में मुलायम सिंह को आगे आना होगा वहीँ एक और फॉर्मूले की बात भी सामने आयी है. चूँकि राज्यसभा के लिए चुनाव होने वाले हैं, दावेदारों की तादाद भी बहुत ज़्यादा है, सपा की बात करें तो विधायकों की संख्या के ऐतबार से वह उच्च सदन में अपने तीन सदस्य सीधे तौर पर भेज सकती है, बाकि बचे वोटों का इस्तेमाल कैसे करती है यह अलग विषय है.
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बात अगर आज़म खान की नाराज़गी करें तो जेल से बाहर निकलकर आज़म खान ने अगर किसी की जमकर तारीफ की है तो वह हैं कांग्रेस नेता कपिल सिब्बल जिन्होंने आज़म खान को ज़मानत दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है, आज़म खान उन्हें फरिश्ता कह रहे हैं, खबर है कि आज़म खान उन्हें राजयसभा का उम्मीदवार बनवाना चाहते हैं, इस बारे में अपना पैग़ाम भी पार्टी प्रमुख को भेज चुके हैं. बता दें कि कपिल सिब्बल का राजयसभा का कार्यकाल समाप्त होने वाला है, फिलहाल वह यूपी से ही कांग्रेस कोटे से राज्यसभा के सदस्य हैं.
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जानकारी मिल रही है कि आज़म खान से पैच अप के लिए अखिलेश यादव को यह फार्मूला पसंद आ रहा है, कपिल सिब्बल को अगर पार्टी की ओर से राज्यसभा का उम्मीदवार बनाया जाता है तो आज़म खान अपनी सारी नाराज़गी भुला सकते हैं. वैसे आज़म खान इस बात के लिए जाने जाते हैं कि वह अगर किसी को भी पसंद करते हैं तो दिल से पसंद करते हैं, फिलहाल कपिल सिब्बल पर उनका दिल मेहरबान है दूसरे अभी यह सिर्फ अंतरिम ज़मानत मिली है, आजम खान को अभी कपिल सिब्बल की आगे बहुत ज़रुरत पड़ेगी। वैसे अखिलेश के लिए यह सौदा बुरा नहीं है. कपिल सिब्बल को अगर राज्यसभा भेजकर अखिलेश-आज़म फिर साथ दिख सकते हैं तो इससे अखिलेश यादव के लिए बनाई जा रही मुस्लिम विरोधी इमेज के प्रयासों को काउंटर किया जा सकता है साथ ही लोकसभा के उपचुनावों में मदद मिलेगी.
