सत्ता में आए तो 90 दिन में देंगे नियुक्ति
जातीय जनगणना पर भी सपा का बड़ा दांव
लखनऊ में सपा की बड़ी प्रेस कॉन्फ्रेंस, आरक्षण, बेरोजगारी और अर्थव्यवस्था को लेकर सरकार पर तीखे हमले
लखनऊ। अखिलेश यादव ने बुधवार को लखनऊ में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस के जरिए भाजपा सरकार पर एक साथ कई मोर्चों पर हमला बोला। 69 हजार शिक्षक भर्ती में आरक्षण गड़बड़ी के आरोपों को लेकर सपा प्रमुख ने कहा कि यदि उनकी सरकार बनती है तो सत्ता संभालने के 90 दिनों के भीतर भर्ती प्रक्रिया पूरी कराकर पात्र अभ्यर्थियों को नियुक्ति दिलाई जाएगी।
समाजवादी पार्टी मुख्यालय में आयोजित इस प्रेस वार्ता में पार्टी के कई वरिष्ठ नेता मौजूद रहे। मंच पर डिम्पल यादव शिवपाल सिंह यादव अवधेश प्रसाद व चर्चित सांसद इकरा हसन मौजूद थी।
“आरक्षण का हक छीना गया”
अखिलेश यादव ने आरोप लगाया कि 69 हजार सहायक शिक्षक भर्ती में आरक्षित वर्गों के अधिकारों का हनन हुआ। उन्होंने कहा कि ओबीसी और एससी वर्ग के अभ्यर्थियों को तय प्रतिशत के अनुसार सीटें नहीं मिलीं। उनके मुताबिक हजारों पद ऐसे रहे जिन पर आरक्षण नियमों का सही पालन नहीं हुआ।
उन्होंने कहा कि यह केवल भर्ती का मामला नहीं, बल्कि सामाजिक न्याय से जुड़ा मुद्दा है। सपा प्रमुख ने दावा किया कि पीडीए यानी पिछड़ा, दलित और अल्पसंख्यक वर्ग के युवाओं को व्यवस्थित तरीके से अवसरों से दूर रखा गया।
अखिलेश ने कहा कि जब युवाओं को अपने अधिकार के लिए अदालतों तक जाना पड़े तो यह सरकार की विफलता को दर्शाता है। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार भर्ती प्रक्रियाओं में पारदर्शिता बनाए रखने में नाकाम रही है।
सपा प्रमुख ने प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान सामाजिक न्याय की राजनीति को विस्तार से सामने रखा। उन्होंने कहा कि संविधान में आरक्षण व्यवस्था इसलिए दी गई थी ताकि समाज के कमजोर और वंचित तबकों को आगे बढ़ने का अवसर मिल सके।
उन्होंने भाजपा पर निशाना साधते हुए कहा कि मौजूदा समय में आरक्षण व्यवस्था को कमजोर करने की कोशिशें की जा रही हैं। उनके मुताबिक लोकतंत्र तभी मजबूत होगा जब हर वर्ग को बराबरी का अवसर मिलेगा। बुलडोजर राजनीति पर तंज कसते हुए अखिलेश ने कहा कि अगर सरकार को सच में बुलडोजर चलाना है तो उसे समाज में फैली असमानता पर चलाना चाहिए। उन्होंने कहा कि गैर-बराबरी खत्म किए बिना सामाजिक संतुलन संभव नहीं है।
जातीय जनगणना को बनाया बड़ा मुद्दा
प्रेस कॉन्फ्रेंस में जातीय जनगणना का मुद्दा भी प्रमुखता से उठा। अखिलेश यादव ने कहा कि उनकी सरकार बनने पर प्रदेश में जातीय जनगणना कराई जाएगी। उन्होंने कहा कि जब तक आबादी का सही आंकड़ा सामने नहीं आएगा, तब तक संसाधनों और अधिकारों का न्यायपूर्ण बंटवारा संभव नहीं है।
सपा प्रमुख ने कहा कि “जिसकी जितनी आबादी, उसकी उतनी हिस्सेदारी” का सिद्धांत लागू होना चाहिए। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि समाजवादी पार्टी आगामी चुनावों में जातीय जनगणना को बड़ा राजनीतिक मुद्दा बनाने की तैयारी में है।
भाजपा के चुनावी ग्राफ पर दावा
अखिलेश यादव ने दावा किया कि पिछले कुछ चुनावों में भाजपा का जनाधार कमजोर हुआ है जबकि समाजवादी पार्टी लगातार मजबूत हुई है। उन्होंने कहा कि पीडीए रणनीति ने भाजपा को चुनौती दी है और आने वाले समय में यह असर और बढ़ेगा।
उन्होंने कार्यकर्ताओं से बूथ स्तर तक संगठन मजबूत करने का आह्वान करते हुए कहा कि यदि हर बूथ पर कुछ वोट भी बढ़ते हैं तो चुनावी तस्वीर पूरी तरह बदल सकती है।
अर्थव्यवस्था और महंगाई पर भी घेरा
सपा प्रमुख ने केंद्र और राज्य सरकार की आर्थिक नीतियों पर सवाल उठाते हुए कहा कि देश में बेरोजगारी और महंगाई लगातार बढ़ रही है। उन्होंने कहा कि आम आदमी की आय घट रही है और खर्च करने की क्षमता कमजोर पड़ रही है।
उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि सरकार केवल बड़े आर्थिक आंकड़ों का प्रचार कर रही है, जबकि जमीन पर युवाओं के पास रोजगार नहीं है। अखिलेश ने कहा कि अगर रोजगार और खरीद क्षमता नहीं बढ़ेगी तो अर्थव्यवस्था मजबूत नहीं हो सकती।
शिवपाल का तीखा हमला
शिवपाल सिंह यादव ने भी प्रेस कॉन्फ्रेंस में भाजपा सरकार और प्रधानमंत्री पर हमला बोला। उन्होंने कहा कि जनता को बड़े सपने दिखाए गए, लेकिन जमीनी स्तर पर हालात अलग हैं। शिवपाल ने आरोप लगाया कि सरकार जनता का ध्यान असली मुद्दों से हटाने का प्रयास कर रही है।
राजनीतिक हलकों में इस प्रेस कॉन्फ्रेंस को 2027 विधानसभा चुनाव की रणनीतिक शुरुआत के रूप में देखा जा रहा है। शिक्षक भर्ती, आरक्षण, जातीय जनगणना और महंगाई जैसे मुद्दों को एक साथ उठाकर समाजवादी पार्टी युवाओं और पिछड़े वर्गों के बीच अपनी पकड़ मजबूत करने की कोशिश में दिखाई दे रही है।
