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Akhilesh का सवाल, माफियाओं की सूची देने से इंकार क्यों?

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प्रयागराज में शुक्रवार को राजूपाल हत्याकांड के मुख्य गवाह उमेश पाल और उसके गनर की हत्या को लेकर उत्तर प्रदेश की सियासत ज़बरदस्त रूप से गरमाई हुई. इस हत्याकांड में कुख्यात माफिया अतीक अहमद का नाम आने से मामला और भी सियासी हो गया है. अतीक अहमद के सपा और बसपा दोनों से रिश्ते रहे हैं, इसके अलावा पीस पार्टी और AIMIM से भी इसके सम्बन्ध रहे हैं. आज के चुनावी माहौल में सभी पार्टियां अतीक अहमद से अपना पीछा छुड़ा रही हैं और माफिया को एक दुसरे की पार्टी का प्रोडक्ट बता रही है, उधर प्रयागराज कांड में घिरे मुख्यमंत्री योगी अतीक अहमद को सपा की देन बता रहे हैं।

अखिलेश का पलटवार

इस बीच भारतीय जनता पार्टी द्वारा अतीक अहमद का समाजवादी पार्टी से कनेक्शन के जवाब में सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने पलटवार करते हुए कहा है कि 2024 के लोकसभा चुनाव में चुनावी फायदा उठाने के लिये भाजपा बड़ी साजिश कर रही है. उन्होंने कहा कि उन्होंने सदन में सरकार से टॉप प्रदेश के माफियाओं की सूची सामने रखने को कहा ताकि पता चले कितने माफिया किस पार्टी से जुड़े हुए हैं लेकिन मुख्यमंत्री सूची देने में आना कानी कर रहे हैं.

माफियाओं की सूची देने से इंकार

सोमवार को अखिलेश यादव ने भाजपा की नीयत पर सवाल खड़ा करते हुए और अतीक का नाम लिए बिना कहा यह समझने की बात है कि कौन- कौन किस किससे मिला हुआ है. उन्होंने कहा यूपी कहा कि अगले साल देश में आम चुनाव हैं, यूपी सबसे बड़ा राज्य है, देश को प्रधानमंत्री देता है. अखिलेश ने कहा कि अब तो सामने आ रहा है कि इस हत्याकांड में भाजपा अल्पसंख्यक प्रकोष्ठ भी शामिल है. मुझे तो यह भाजपा की कोई बड़ी चुनावी साज़िश लगती है. उन्होंने कहा कि आने वाले चुनाव को देखते हुए भाजपा कहाँ कहाँ, किस किस पर डोरे डाल रही है, मुख्यमंत्री जी माफ़िया का नाम ले रहे हैं वो कहाँ से आये हैं , किधर से आये हैं यह सबको मालूम है, इसीलिए मैंने प्रदेश के माफियाओं की विस्तृत सूची सदन के पटल पर रखने की मांग की थी, ताकि असलियत सामने आ सके.

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