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Akhilesh का आरोप: मंहगाई, बेरोज़गारी के मुद्दे को दबाना चाहती है भाजपा सरकार

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समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष और नेता विरोधी दल अखिलेश यादव ने आज फिर आरोप लगाया कि भाजपा मंहगाई और बेरोजगारी जैसे मुद्दों को दबाने के लिए जबरन विपक्षी नेताओं को फर्जी केस में फंसाती है। लेकिन भाजपा के इन हथकंड़ो से संघर्षशील नेता और कार्यकर्ता डरने वाले नहीं है। अखिलेश यादव ने कहा कि उत्तर प्रदेश में सिर्फ 4 प्रतिशत बेरोजगारी दर बताई जा रही है। इसका मतलब क्या 90 प्रतिशत बेरोजगारों को रोजगार मिल गया है? गैस सिलेण्डर, दूध, आटा, दाल सब महंगा हो गया है। महंगाई से लोग त्राहि-त्राहि कर रहे हैं। भाजपा के पास महंगाई कम करने का कोई भी जवाब नहीं है।

भाजपा सरकारों ने किसानों को छला

सपा प्रमुख ने कहा कि प्रदेश का किसान भाजपा सरकारों द्वारा बुरी तरह छला गया है। उसको न तो आय दोगुनी हुई है और न ही एमएसपी मिली है। गन्ना किसान को बकाया भुगतान भी नहीं मिला। नौजवान का भविष्य अंधेरे में हैं। शिक्षामित्र आज भी परेशान और बेहाल हैं। गरीब की रोजी-रोटी पर आफत है। कानून व्यवस्था पूरी तरह चौपट है। अपराधी बेखौफ हैं। खाकी की साख में गिरावट है। अखिलेश ने कहा कि भाजपा ने जिस उद्योगपति को बढ़ाया था और दुनिया में नम्बर 2 पर पहुंचा दिया था, वह 20 लाख करोड़ रूपये के घाटे में चला गया है। एलआईसी और एसबीआई जैसी सरकारी संस्थाओं का पैसा डूब गया। केन्द्र सरकार कार्रवाई क्यों नहीं कर रही है?

जातीय जनगणना पर सपा का अभियान जारी

वहीँ ’जातीय जनगणना’ को लेकर पिछड़ा वर्ग प्रकोष्ठ के प्रदेश अध्यक्ष डॉ0 राजपाल कश्यप की निगरानी में अभियान जारी है, आज भी सोनभद्र के ब्लॉक चोपन स्थित आदिवासी बाहुल्य गांव करगरा व विधानसभा क्षेत्र दुद्धी के गांव म्योरपुर में जनसमूह को संबोधित किया गया। डॉ0 राजपाल कश्यप ने कहा कि जातीय जनगणना के बिना प्राप्त आंकड़े अधूरे होते हैं 1931 के अंतिम जनगणना में सब जातियों को भी गिना गया था तब देश को पता चल सका कि इस देश में कौन सी जातियां कितनी शिक्षा, रोजगार संसाधन, जमीन का मालिकाना हक या सम्पन्नता पा सकीं। गरीबों में सबसे हाशिये पर कौन है? बेघर कौन लोग है? अशिक्षित कौन सबसे ज्यादा रह गया। डॉ0 कश्यप ने कहा कि बिना जातियां गिने वंचित शोषित वर्ग की पहचान अधूरी रह जाती है। आदिवासी समाज के लिए माननीय अखिलेश यादव जी ने विधानसभा से आरक्षण करा कर दो सीटें आदिवासी समाज के लिए आरक्षित कराई जिससे सदन में हर वर्ग, समाज के व्यक्ति का प्रतिनिधित्व सुनिश्चित हो सके।

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