अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने 2026 के नोबेल शांति पुरस्कार की घोषणा से ठीक पहले एक बार फिर अपनी दावेदारी को लेकर खुलकर बात की है। ट्रंप ने कहा कि उन्होंने दुनिया के आठ संघर्षों को सुलझाने में भूमिका निभाई है और उनका मानना है कि वह नोबेल शांति पुरस्कार के हकदार हैं।
हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि उन्हें नहीं पता कि नॉर्वेजियन नोबेल कमेटी इस बार क्या फैसला करेगी।
बुधवार को पत्रकारों से बातचीत में ट्रंप ने कहा कि उन्होंने ऐसे काम किए हैं जो शायद किसी अन्य अमेरिकी राष्ट्रपति ने नहीं किए और अपने दूसरे कार्यकाल के दौरान आठ अंतरराष्ट्रीय संघर्षों में शांति स्थापित करने का दावा किया।
ट्रंप बोले- मुझे मिलना चाहिए Nobel Peace Prize
ट्रंप पिछले कई महीनों से सार्वजनिक रूप से नोबेल शांति पुरस्कार का जिक्र करते रहे हैं।
उन्होंने बुधवार को कहा कि पुरस्कार की घोषणा का समय करीब आ गया है और उनके कूटनीतिक रिकॉर्ड को देखते हुए उन्हें इसका हकदार माना जाना चाहिए।
हालांकि ट्रंप ने अपनी संभावनाओं को लेकर संदेह भी जताया और कहा कि उन्हें नहीं पता कि नोबेल कमेटी क्या निर्णय लेगी। 2026 का नोबेल शांति पुरस्कार शुक्रवार, 9 अक्टूबर को घोषित किया जाएगा।
किन ‘8 संघर्षों’ का दावा करते हैं ट्रंप?
व्हाइट हाउस ट्रंप के रिकॉर्ड में कंबोडिया-थाईलैंड, सर्बिया-कोसोवो, रवांडा-डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ कांगो, भारत-पाकिस्तान, मिस्र-इथियोपिया, आर्मेनिया-अजरबैजान, इजरायल-ईरान और गाजा संघर्ष को शामिल करता है।
हालांकि इन सभी मामलों को पूरी तरह समाप्त युद्ध मानने पर सहमति नहीं है।
Reuters की समीक्षा के मुताबिक, कुछ संघर्षों में अमेरिका ने मध्यस्थता की या युद्धविराम तक पहुंचने में भूमिका निभाई, लेकिन कई मामलों में मूल विवाद अब भी कायम हैं या हिंसा दोबारा भड़क चुकी है।
भारत-पाकिस्तान को लेकर भी किया है दावा
ट्रंप भारत और पाकिस्तान के बीच मई 2025 में हुए सैन्य तनाव को भी उन संघर्षों में गिनते हैं जिन्हें उन्होंने सुलझाने का दावा किया है।
अमेरिकी अधिकारियों ने उस समय दोनों देशों के बीच तनाव कम करने के लिए संपर्क किया था। हालांकि भारत ने बार-बार इस दावे को खारिज किया है कि अमेरिका के व्यापारिक दबाव या ट्रंप की मध्यस्थता के कारण सैन्य कार्रवाई रुकी थी।
इसी तरह कांगो-रवांडा समझौते और कंबोडिया-थाईलैंड सीमा विवाद में भी संघर्ष दोबारा उभरने के मामले सामने आए हैं।
Ukraine और Iran अब भी बड़ी चुनौती
ट्रंप ने चुनाव प्रचार के दौरान रूस-यूक्रेन युद्ध को तेजी से समाप्त कराने का वादा किया था, लेकिन अब तक कोई स्थायी समाधान नहीं निकला है।
वहीं ईरान के साथ संघर्ष भी उनके शांति रिकॉर्ड पर सवाल खड़े करता है। Reuters के मुताबिक, अमेरिका और इजरायल के ईरान पर हमलों के बाद शुरू हुआ संघर्ष महीनों तक जारी रहा और उसने वैश्विक ऊर्जा बाजार को भी प्रभावित किया।
इस वजह से ट्रंप के “आठ युद्ध खत्म करने” के दावे को उनकी सरकार की राजनीतिक और कूटनीतिक व्याख्या के रूप में देखा जा रहा है, न कि सभी मामलों में निर्विवाद तथ्य के रूप में।
कई देशों के नेताओं ने किया ट्रंप को Nominate करने का दावा
कंबोडिया, इजरायल और पाकिस्तान के नेताओं ने सार्वजनिक रूप से कहा है कि उन्होंने ट्रंप को नोबेल शांति पुरस्कार के लिए नामित किया है।
हालांकि नॉर्वेजियन नोबेल कमेटी उम्मीदवारों की आधिकारिक सूची को 50 वर्षों तक गोपनीय रखती है, इसलिए ऐसी व्यक्तिगत nominations की स्वतंत्र आधिकारिक पुष्टि नहीं की जाती। 2026 के पुरस्कार के लिए कुल 287 उम्मीदवार नामित हैं, जिनमें 208 व्यक्ति और 79 संगठन शामिल हैं।
पहले कार्यकाल से ही Nobel का जिक्र करते रहे हैं Trump
नोबेल शांति पुरस्कार को लेकर ट्रंप की दिलचस्पी नई नहीं है।
अपने पहले राष्ट्रपति कार्यकाल में भी उन्होंने उत्तर कोरिया के नेता किम जोंग उन के साथ हुई बैठकों और परमाणु तनाव कम करने की कोशिशों को अपनी बड़ी कूटनीतिक उपलब्धियों के रूप में पेश किया था।
हालांकि उन वार्ताओं से उत्तर कोरिया के परमाणु कार्यक्रम को समाप्त करने वाला स्थायी समझौता नहीं हो सका।
ट्रंप ने अपने दूसरे कार्यकाल में भी कई बार नोबेल पुरस्कार का मुद्दा उठाया है। जनवरी 2026 में नॉर्वे के प्रधानमंत्री जोनास गार स्टोरे को भेजे एक संदेश में भी उन्होंने आठ युद्ध रोकने का दावा करते हुए पुरस्कार न मिलने पर नाराजगी जताई थी।
9 अक्टूबर को होगा फैसला
2026 के नोबेल शांति पुरस्कार के विजेता का ऐलान नॉर्वे की राजधानी ओस्लो में 9 अक्टूबर को किया जाएगा।
नोबेल कमेटी की पांच सदस्यीय टीम विजेता का चयन करती है। कमेटी के अनुसार पुरस्कार का उद्देश्य अंतरराष्ट्रीय सहयोग, शांति और संघर्षों को कम करने की दिशा में उल्लेखनीय योगदान को सम्मानित करना है।
ऐसे में ट्रंप की ताजा टिप्पणी पुरस्कार की घोषणा से ठीक पहले आई है। वह अपने कूटनीतिक रिकॉर्ड को शांति प्रयासों की बड़ी उपलब्धि के रूप में पेश कर रहे हैं, जबकि उनके कई दावों की सीमा और प्रभाव को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बहस जारी है।
