Agneepath Recruitment Scheme: देश रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कल सेना में शार्ट टर्म भर्ती के लिए ‘अग्निपथ भर्ती योजना’ का एलान किया जो नौजवानों को सेना में चार साल के लिए भर्ती का मौका देगी , उनमें से 25 फीसद को स्थाई काडर भी मिलेगा लेकिन शेष 75 फीसद के बारे में कुछ भी नहीं कि चार वर्ष पूरे होने के बाद उनका क्या होगा? मुख्य विपक्षी पार्टी कांग्रेस ने इसी मुद्दे को लेकर चिंता जताई है और सरकार के फैसले पर बड़ा सवाल उठाते हुए पूछा कि भर्ती होने वाला वो नौजवान क्या आरएसएस या बीजेपी का कार्यकर्ता होगा? सवाल ये भी होगा कि क्या इन नौजवानों को बन्दूक चलाना सिखाकर समाज में खुला छोड़ दिया जायेगा, 18 साल के युवक को बन्दूक चलाने का लाइसेंस देकर और दोबारा बेरोज़गार बनाकर सरकार देश में कैसा माहौल पैदा करना चाहती है।
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छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने कहा कि दरअसल सरकार की नीयत में खोट है, इनका मकसद नौजवानों को रोज़गार देना नहीं, उन्हें भटकाना है, उनके जीवन के साथ खेलना है उन्हें चुनावी टूल बनाना है. बघेल ने कहा कि अगर रोज़गार को देना है तो उसे 20 वर्षों का दीजिये, 35 साल तक सेना में रखिये। वहीँ राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गेहलोत ने सवाल उठाया कि किन नौजवानों को सेना में यह शार्ट टर्म नौकरी दी जाएगी और वह कौन से नौजवान होंगे जिन्हें 25 परसेंट स्थाई काडर मिलेगा। क्या यह नौजवान भाजपा या आरएसएस के कार्यकर्ता होंगे। गेहलोत ने कहा कि सरकार ने हर साल दो करोड़ नौकरियां देने की बात कही थी, उस हिसाब से अबतक 16 करोड़ लोगों को नौकरियां मिल जानी चाहिए। 60 लाख पद तो केंद्रीय नौकरियों में खाली पड़े हैं और अब यह 45 हज़ार नौकरियों की घोषणा कर रहे हैं।
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वहीँ कांग्रेस महासचिव रणदीप सिंह सुरजेवाला ने सरकार की इस योजना को खतरनाक बताते हुए इस मुद्दे पर कहा कि सेनाओं की गरिमा और अनुशासन की परिपाटी से मोदी सरकार खिलवाड़ कर रही है। उन्होंने पूछा चार साल की नौकरी के बाद भर्ती हुए युवाओं के भविष्य का क्या होगा? सुरजेवाला ने कहा कि जब अपना सेवाकाल पूरा करके एक सैनिक समाज में वापस लौटता है तो सभी जानते हैं कि उसको किस तरह की नौकरी मिलती है और कितने फीसद लोगों को? ऐसे में सिर्फ चार साल की अधूरी ट्रेनिंग और बिना किसी अतिरिक्त कौशल के जब यह एकबार फिर बेरोज़गार होंगे तो इन्हें कौन नौकरी देगा?

