नईदिल्ली: कांग्रेस शासित दो प्रमुख राज्यों पंजाब और छत्तीसगढ़ मे पाटीं की अंदरूनी कलह ने दिल्ली मे पार्टी हाइ कमान की मुश्किले बढ़ा दी हैं। एक तरफ जहां पंजाब कांग्रेस प्रमुख नवजोत सिंह सिद्धू Siddhu के सलाहकार मलविंदर सिंह माली के इस्तीफे के बाद पंजाब में चले आ रहे हैं राजनीतिक घमसान में आखिरकार कुछ विराम लगता दिख रहा है तो दूसरी तरफ छत्तीसगढ़, मुख्यमंत्री पद विवाद के चलते पार्टी की मुश्किलें कम नहीं हो रही हैं।
बता दें कि सिद्धू ने प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष पद सम्भालने से पहले ही अपने सहयोगियों के साथ मिलकर पंजाब मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह के खिलाफ मोर्चा खोल रखा है। Siddhu ने अध्यक्ष पद पर काबिज होने से पहले अमृतसर स्थित अपने निवास पर 60 से अधिक विधायकों के साथ शक्ति प्रदर्शन कर स्पष्ट संकेत दे दिया था कि उनकी महत्वाकांक्षाएं राज्य में कुछ ज्यादा पाने की हैं।
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हाई कमान से समर्थन के बाद सिद्धू पर भारी पड़े कैप्टन
कांग्रेस के पंजाब प्रभारी हरीश रावत ने कहा कि “कश्मीर देश का अभिन्न अंग है” और यही पार्टी का मत हैं। इस मुद्दे पर चल रहे विवाद को उन्होने सिद्धू और उनके सलाहकार माली के बीच का मामला बताते हुए खारिज कर दिया।
इससे पहले जिन चार कैबिनेट मंत्री – तृप्त राजिंदर सिंह बाजवा, सुखबिंदर सिंह सरकारिया, सुखजिंदर सिंह रंधावा और चरणजीत सिंह चन्नी ने सीएम Amrinder के खिलाफ देहरादून में रावत से मुलाक़ात कर बगावत का झंडा बुलंद किया था वो भी अब नर्म पड़ते नजर आ रहे हैं।
बता दे कि पंजाब में मुख्यमंत्री Captain Amrinder Singh के खिलाफ बगावत के सुर उभरने के बीच ही दिल्ली हाइ-कमान से सख्त संदेश मिलने के बाद हरीश रावत ने कहा यह कहकर अटकलों पर विराम लगा दिया था कि “पंजाब कांग्रेस 2022 मे कैप्टन अमरिंदर सिंह की अगुवाई में ही चुनाव लड़ेगी”।
छत्तीसगढ़ कांग्रेस की आंतरिक कलह भी पहुंची दिल्ली दरबार
कांग्रेस शासित तीन महत्वपूर्ण राज्यों राजस्थान, पंजाब और अब छत्तीसगढ़ में पार्टी की मुश्किलें खत्म होने के नाम नहीं ले रही हैं। पिछले साल राजस्थान में CM अशोक गहलोत और Sachin Pilot के बीच चल रही राजनीतिक रस्साकसी को किसी तरह समझौते और वादों से शान्त करने के बाद अब छत्तीसगढ़ में बारी-बारी से मुख्यमंत्री पद का मुद्दा कांग्रेस के लिए ताजा सिरदर्द बन गया हैं।
बता दे कि 90 सदस्यीय छत्तीसगढ़ विधानसभा में कांग्रेस के 70 सदस्यों में से 56 विधायकों के समर्थन के दावे के साथ मुख्यमंत्री बघेल ने दिल्ली मे केन्द्रीय नेत्रत्व के सामने शक्ति प्रदर्शन कर अपना मजबूत दावा पेश किया है। तो वहीं सरगुजा के पूर्व वंशज टीएस सिंह देव भी दिल्ली में डेरा डाले हुए हैं।
कांग्रेस आलाकमान ने छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल को शुक्रवार को दिल्ली में तलब किया था ताकि गतिरोध को विराम दिया जा सके। हालांकि कांग्रेस के लिए यहाँ भी राजस्थान जैसा धर्मसंकट हैं जहाँ उसे CM Baghel जैसे शक्तिशाली ओबीसी नेता को साधने के साथ टीएस सिंह देव को भी संभालना हैं।
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खनिज सम्पदा से संपन्न राज्य के 90 सदस्यीय सदन में कांग्रेस के 70 विधायक हैं, लेकिन फिर भी पार्टी के भीतर सब कुछ ठीक नहीं है क्योंकि सिंह देव CM बघेल को बदलने के लिए 2018 मे किए गए वादे को याद दिला रहे हैं।
बता दे कि पंजाब कि तरह छत्तीसगढ़ में भी कांग्रेस को बघेल ने अपने दम पर आलाकमान को दूर रख आगे बढ़ाया हैं इसलिए राजनीतिक विश्लेषक भी बघेल का पलड़ा भारी पड़ने कि संभावना जता रहे हैं।