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UP Waqf Board: मदरसों के बाद अब वक्फ सम्पत्तियों की बारी

उत्तर प्रदेश में प्राइवेट मदरसों के सर्वे पर मचा बवाल अभी थमा भी नहीं कि योगी सरकार वक़्फ़ सम्पत्तियों की जांच की ओर कदम बढ़ा दिया है. सरकार ने अब फैसला किया है कि मदरसों का सर्वे तो चलता ही रहेगा लेकिन अब साथ में वक़्फ़ बोर्ड की सम्पत्तियों की भी जांच शुरू की जाएगी. सरकार ने 1989 के वक्त के वक़्फ़ के एक शासनादेश को रद्द कर इसकी शुरुआत भी कर दी है. सरकार का मानना है कि 1989 में जारी हुआ अध्यादेश गलत है और अब सरकार 33 साल पुरानी गलती को सुधारेगी। 

सरकार का कहना है कि पुरानी सभी गलतियों को सुधारते हुए 1989 के बाद से वक़्फ़ में शामिल की गयी सभी सम्पत्तियों की सरकार जांच कराएगी.बता दें कि 1989 में टीलेदार, बंजर और उसर ज़मीनों को वक़्फ़ की संपत्ति के रूप में स्वतः दर्ज करने का अध्यादेश जारी हुआ था जिसके लगातार दुरूपयोग की खबरे आती रहती थीं. इस अध्यादेश के बहाने बहुत सारी कृषि योग्य ज़मीनों भी वक़्फ़ मानकर उनका इंदराज कर दिया जाता था.

सरकार ने प्रदेश के सभी जिलाधिकारियों और कमिश्नरों को निर्देश दिए हैं  कि 7 अप्रैल 1989 से अब तक जितनी भी संपत्तियां वक़्फ़ में दर्ज कराई गई हैं उनके दस्तावेजों की नए सिरे से जांच कर उन्हें जमीनों का स्टेटस दर्ज किया जाए. आदेश के मुताबिक कब्रिस्तान, मस्जिद और ईदगाह की जमीनों का सही से आकलन और सीमांकन किया जाए. दरअसल 1989 के आदेश में बिना आवेदन के ही संपत्तियों को वक्फ में दर्ज करने की बातें सामने आई और इसीलिए  इस शासनादेश को रद्द किया गया है.

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