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10 घंटे की सर्जरी कर चार किलो का ट्यूमर निकाला

प्रेस रिलीज़10 घंटे की सर्जरी कर चार किलो का ट्यूमर निकाला

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10 घंटे की सर्जरी कर चार किलो का ट्यूमर निकाला

मैक्स सुपर स्पेशियलिटी हॉस्पिटल, वैशाली में डॉक्टरों ने की दुर्लभ सर्जरी
सफल सर्जरी के बाद महिला को मिली छुट्टी, तेजी से हो रहा स्वास्थ्य लाभ

न्यूज डेस्क। मैक्स सुपर स्पेशियलिटी हॉस्पिटल, वैशाली में चिकित्सकों ने लीओमायोसार्कोमा ट्यूमर से पीडित 35 वर्षीय एक महिला की 10 घंटे तक चली सर्जरी के बाद 4 किलो का ट्यूमर निकालने में सफलता प्राप्त की। अब महिला तेजी से स्वास्थलाभ प्राप्त कर रही है।

आईवीसी लीओमायोसार्कोमा अपेक्षाकृत असामान्य ट्यूमर है और चिकित्सा क्षेत्र में इसके बहुत कम मामले दर्ज किए गए हैं। मैक्स सुपर स्पेशियलिटी हॉस्पिटल के विशेषज्ञ चिकित्सकों की टीम ने अपनी तरह के एकमात्र मामले में सर्जरी कर इतिहास रचा है।

यह दुर्लभ सर्जरी करने वाले सर्जन, मैक्स हॉस्पिटल, वैशाली के मैक्स इंस्टीट्यूट ऑफ कैंसर केयर के गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल एंड एचपीबी सर्जिकल ऑन्कोलॉजी के एसोसिएट डायरेक्टर और हेड डॉ विवेक मंगला ने बताया कि, “मरीज को पिछले कुछ महीनों से दाहिने पैर में सूजन हो रही थी और यह सूजन बढती जा रही थी, लेकिन महामारी के कारण डॉक्टर से मिलने में देरी हुई।

उसकी हालत इस हद तक बिगड़ गई कि वह बिल्कुल भी नहीं चल पा रही थी और उसे स्ट्रेचर पर लाया गया। महिला की गहन जांच करने के बाद हमें एक बड़े, अपेक्षाकृत असामान्य ट्यूमर, लीओमायोसार्कोमा का पता चला। रोगी की स्थिति और ट्यूमर की सीमा को ध्यान में रखते हुए, हमने ट्यूमर में हो रही वृद्धि और साथ ही साथ थ्रोम्बस के विस्तार को रोकने के लिए एंटीकोआग्यूलेशन (ब्लड थिनर्स) शुरू करने, साथ ही ट्यूमर की वृद्धि को रोकने के लिए कीमोथेरेपी देने का फैसला किया।ष्

उसके बाद अगले दो महीनों तक, मैक्स हॉस्पिटल, वैशाली के डॉक्टरों की एक टीम की सावधानीपूर्वक निगरानी में उसका इलाज जारी रहा, इस दौरान उसकी स्थिति में उल्लेखनीय सुधार हुआ और ट्यूमर का फैलाव नहीं हुआ। सर्जिकल टीम जिसमें मेडिकल ऑन्कोलॉजी और हेमाटोलॉजी के सीनियर कंसल्टेंट डॉ विकास गोस्वामीय रेडियोलॉजी के प्रमुख कंसल्टेंट डॉ अभिषेक अग्रवालय गैस्ट्रोएंट्रोलॉजी और हेपेटोलॉजी के एसोसिएट डायरेक्टर डॉ सुभाषीश दासय सीनियर कंसल्टेंट और प्रभारी (वैस्कुलर और एंडोवास्कुलर सर्जरी) डॉ कपिल गुप्ता शामिल थे, उन्होंने सभी उचित सावधानी और सुरक्षा उपायों पर अमल करते हुए सर्जरी की योजना बनाई।

डॉ मंगला ने बताया कि, सफल सर्जरी के 7 दिन बाद महिला के बिना किसी परेशानी के काफी हद तक ठीक होने के कारण छुट्टी दे दी गई और अब वह तेजी से ठीक हो रही है। आईवीसी लीओमायोसार्कोमा अपेक्षाकृत असामान्य ट्यूमर है। इस तरह के ट्यूमर के लिए आईवीसी में बाईं रीनल वेन के पुनरू प्रत्यारोपण के साथ-साथ पीटीएफई ग्राफ्ट के साथ इतने लंबे हिस्से का आईवीसी रिप्लेसमेंट पहली बार बहुत अच्छी तरह से किया जा सका है।

आईवीसी के लगभग 74 प्रतिशत लीओमायोसार्कोमा 40 से 60 साल की उम्र के बीच की महिलाओं को प्रभावित करते हैं। इस तरह के कैंसर की सर्जरी के लिये अत्यंत उन्नत सुविधाओं और एक विशेषज्ञ टीम ग की आवश्यकता होती है। इसे मैक्स हॉस्पिटल, वैशाली में टीम के द्वारा पूर्णता के साथ अंजाम दिया गया क्योंकि उन्होंने जटिल उपचार और पुनर्निर्माण की आवश्यकता वाले एक बड़े ट्यूमर के मामले में भी अच्छे परिणामों के साथ सुरक्षित और पूर्ण शल्य चिकित्सा को सुनिश्चित करने के लिए मिलकर काम किया।

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