नई दिल्ली: तालिबान द्वारा पिछले रविवार को काबुल पर कब्जे के बाद अफगानिस्तान में घटनाक्रम तेजी से बदला हैं और सबसे रोमांच की बात यह है कि Taliban और उसके रूख को लेकर दुनिया के जानकार दो खेमों में बटें नजर आ रहे हैं। एक तरफ जहां कुछ देश तालिबान के बदले हुए रुख यानि उसके moderate होने कि दुहाई दे रहे है तो दूसरी तरफ Afghan नागरिक और अफ़ग़ानिस्तान से जुड़े जानकार इसे Taliban द्वारा दुनिया को पैसों के लिए बेवकूफ बनाने वाली नौटंकी बता रहे हैं।
गौरतलब हैं कि इस बार तालिबान सोशल मीडिया और अपने बयानों से दुनिया को ये संदेश देने कि कोशिश कर रहा है कि वो समय के साथ बदल गया हैं। लेकिन ऐसा नहीं हैं आज भी उसका बर्बरता और औरतों के प्रति क्रूरता में कोई कमी नहीं आई हैं सभी क्षेत्रो से औरतों के ब्युटि पार्लर (beauty parlour) बंद कराने और उनके बाहर जाने पर प्रतिबंध की ख़बरे आ रहीं हैं। हालांकि Taliban के प्रवक्ता जाबिउल्लाह मुहाजिद ने कहा हैं कि इस बार औरतों को बुर्का पहनना जरूरी नहीं होगा लेकिन हिजाब का इस्तेमाल जरूरी होगा। दूसरी तरफ कट्टर इस्लामिक मूल्यों पर शरिया (Sharia) शासन की बात कहीं जा रही हैं।
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बता दे कि तालिबान द्वारा जबर्दस्ती कब्जे के बाद 36 मिलियन अफगानों के लिए गहरा मानवीय संकट पैदा हो गया हैं। क्योंकि तालिबान ने हथियारों के बल पे सत्ता तो प्राप्त कर ली लेकिन अभी तक उसे Afghanistan के केंद्रीय बैंक के लगभग 9 बिलियन डॉलर मे से एक भी रुपये नहीं मिल पाया हैं, क्योंकि इस रिजर्व का अधिकांश हिस्सा न्यूयॉर्क फेडरल रिजर्व के पास है। जबकि अफ़ग़ानिस्तान को 23 अगस्त को अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) से मिलने वाले लगभग $450 मिलियन डॉलर को भी Biden सरकार ने देश में तनाव के चलते रोक दिया था। वहीं अमेरिकी राष्ट्रपति जो बिडेन ने स्वीकार किया कि उन्हें नहीं पता कि तालिबान व्यापक वैश्विक अर्थव्यवस्था का हिस्सा बनना चाहता है भी या नहीं।
हालांकि चीन (China) जिसकी नजर अफगानिस्तान के खनिज उत्पादों जैसे लिथियम और कापर (तांबे) पर हैं जो वहाँ प्रचुर मात्रा में हैं जिसकी कीमत एक अनुमान के मुताबिक करीब 1 ट्रिलियन डॉलर से अधिक है इसलिए वो तालिबान को पाकिस्तान के साथ मिलकर आर्थिक सहायता और मान्यता दोनों देने को तैयार हैं।
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