नईदिल्ली: तालिबान द्वारा रविवार को काबुल पर कब्जे के बाद अफगानिस्तान में घटनाक्रम तेजी से बदला हैं, वहाँ अब चारों ओर भय और अराजकता का माहौल हैं। इसी भय के चलते अमेरिका (USA) ने भी अपने दूतावास कर्मचारियों को निकाल लिया हैं। तालिबान के कब्जे के बाद भारत सरकार ने भी भारतीय वायु सेना की मदद से मंगलवार सुबह काबुल Kabul के हवाई अड्डे से अपने दूतावास के सभी कर्मचारियों और अन्य महत्वपूर्ण दस्तावेजों को सकुशल भारत वापस ले आया।
सूत्रों के अनुसार लगभग 130 लोग देश मे लौट आयें हैं। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता अरिंदम बागची ने सोमवार को कहा कि अफगानिस्तान के ताजा घटनाक्रम पर हमने नजर बना रखी हैं और उच्च स्तर पर निरंतर निगरानी की जा रही है और काबुल हवाई अड्डे पर वाणिज्यिक संचालन के निरस्त होने से भारत के प्रत्यावर्तन प्रयासों को रोक दिया है।
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बता दे कि अफगानिस्तान के राष्ट्रपति अशरफ गनी के एक अज्ञात स्थान पर चले जाने की खबर के कुछ घंटों बाद तालिबान ने रविवार की शाम को काबुल में अफगान सरकार को बेक्द्खल करने की प्रक्रिया शुरू कर दी थी। बागची तालिबान द्वारा अफगानिस्तान के अधिग्रहण के बाद की ताजा स्थिति पर मीडिया को संभोधित कर रहे थे। उन्होने कहा कि हम अफगान सिख और हिंदू समुदायों के प्रतिनिधियों के साथ लगातार संपर्क में हैं। “हम उन लोगों की भारत वापसी की व्यवस्था कर रहे हैं जो अफगानिस्तान छोड़ भारत आना चाहते हैं,” ।
चूंकि भारत अफगानिस्तान में एक प्रमुख निवेशक और हितधारक है जिसने वहाँ लगभग 500 परियोजनाओं को पूरा करने में लगभग 3 बिलियन अमरीकी डालर का निवेश किया है। हालांकि तालिबान के अधिग्रहण के बाद भारत द्वारा बनाई गयी परियोजनाओं को खतरा उत्पान्न हो गया हैं, क्योंकि Taliban का समर्थक पाकिस्तान यहीं चाहता हैं।
तालिबान द्वारा अफगानिस्तान में कब्जे कि शुरुआत मई से हुई जब अमेरिका ने 9/11 के हमलों की 20वीं बरसी से पहले ही 1 मई से अपने सैनिकों को वापस बुलाना शुरू किया था। गौरतलब हैं कि पिछले एक सप्ताह में लड़ाको ने देश के 34 में से अधिकतर राजधानियों पर कब्जा कर के रविवार को काबुल पर भी कब्जा कर लिया था। देश-विदेश के सुरक्षा जानकार भी काबुल के इतनी जल्दी अधिग्रहण से चकित है। हालांकि अमेरिका के राष्ट्रपति Joe Biden ने इस पूरे मुद्दे से ये कहते हुए पल्ला झाड़ लिया कि जब “ अफगान सेना ही लड़ना नहीं चाहती है तो अमेरिका उनकी मदद कैसे कर सकता हैं”।
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बता दे कि अमेरिका ने पिछले दो दशकों में करीब 3 trillion रुपये अफगान Afghan सेना को आत्मनिर्भर बनाने और आतंकवाद को खत्म करने मे लगा दिये, लेकिन अब लगता है कि ये सब व्यर्थ हो गया। Pakistan और अफगान सेना ने केवल अपनी तिजोरियाँ भरी लेकिन जमीन पर कुछ भी ठोस नहीं किया, जिससे Taliban को सिकस्त दी जा सके। अमेरिका द्वारा अफगानिस्तान मे पिछले 20 वर्षो से लड़े जा रहे युद्ध मे ये उसकी बहुत बड़ी रणनीतिक हार है और बाइडेन Biden के माथे पर एक कलंक के समान हैं। हालांकि USA की रणनीतिक हार की सबसे बड़ी वजह उसका पाकिस्तान (Pakistan) पर भरोसा करना था जो पिछले 20 वर्षो से एक तरफ आतंकवाद से लड़ाई के नाम पर USA से पैसे लूटता रहा और दूसरी तरफ Taliban को अपने यहाँ ट्रेनिंग और सुरक्षा देता रहा। बता दे कि Taliban का मुख्यालय Quetta Shurra, Balochistan मे ही हैं जहां से तालिबान का संचालन होता हैं। उसके सभी बड़े नेताओं के परिवार पाकिस्तानी आर्मी की सुरक्षा में रहते हैं।

