अमित बिश्नोई
खैराबाद कस्बे के महर्षि श्री लक्ष्मण दास उदासीन आश्रम का महंत बजरंग मुनि दास जब 2 अप्रैल को नवरात्रि और हिंदू नववर्ष के अवसर निकाले गए एक जुलूस के दौरान एक मस्जिद के सामने देश की मुस्लिम महिलाओं के खिलाफ नफरती शब्दों का खुलेआम इस्तेमाल कर रहा था तब शायद उसने यह नहीं सोचा होगा कि उसके खिलाफ कोई कानूनी कार्रवाई भी हो सकती है।
वह खुले आम एक समुदाय विशेष की औरतों को घरों से निकालकर उनका सरे आम बलात्कार करने की बात कर रहा था। उसके हौसले बुलंद थे क्योंकि वह पहले भी इस अल्पसंख्यक समुदाय के खिलाफ कई बार आग उगल चूका था और खुले आम घूम रहा था। वह उसी गुमान में था कि उसका कोई कुछ नहीं बिगाड़ सकता। लेकिन इस बार मामला बिगड़ गया। उसकी टाइमिंग ख़राब हो गयी। देश के कई राज्यों में राम नवमी के मौके पर हिंसक वारदातें हुई मगर यूपी अछूता रहा।
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बजरंग मुनिदास के भड़काऊ भाषण के बावजूद मुस्लिम समुदाय नहीं भड़का, हालाँकि खैराबाद मुस्लिम बहुल क्षेत्र है। और शायद यही वजह रही के 6 दिन बाद ही सही इस विषैले महंत के खिलाफ पुलिस को FIR दर्ज करनी पड़ी।
इधर महिला संगठनों और राष्ट्रीय महिला आयोग का भी दबाव बढ़ने लगा। वही आज मुख्यमंत्री आदित्यनाथ ने सुबह ही कहा कि देश के सात आठ राज्यों में राम नवमी पर हिंसा हुई लेकिन यूपी में तू तू मैं मैं भी नहीं हुई।
मुख्यमंत्री के इस बयान के कुछ ही घंटों बाद महंत बजरंग मुनि की गिरफ़्तारी की खबर आ गयी। विषैले महंत की गिरफ़्तारी को लोग अब मुख्यमंत्री योगी के बयान से जोड़ रहे हैं। लोग के कयास में सच्चाई भी हो सकती है. और अगर ऐसा है तो यह और भी अच्छी बात होगी।
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वैसे तो इस तरह के ज़हरीले बोलों का यह कोई पहला मामला नहीं हैं लेकिन किसी महंत के खिलाफ भाजपा शासित राज्य में गिरफ़्तारी का इतना त्वरित मामला शायद पहला होगा। इस रामनवमी में भगवाधारियों द्वारा किसी मस्जिद के सामने प्रदर्शन करने के कई मामले सामने आये हैं जो हिंसा की वजह भी बने हैं। उत्तर प्रदेश में इस तरह का इस रामनवमी में यह इकलौता मामला था जहाँ एक मस्जिद के सामने महिलाओं के इज़्ज़त को तार तार करने वाली बातें कही गयीं और साथ में मौजूद भीड़ जय श्री राम के नारे लगाती रही।
बेशक पुरुषोत्तम भगवान राम को भी इस तरह के जयकारे पसंद नहीं आये होंगे और शायद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को भी महंत बजरंग मुनिदास की यह अमर्यादित हरकत पसंद नहीं आयी और तभी वह आज गिरफ़्तारी की ज़द में आया है।
आगे क्या होगा, उसके खिलाफ सरकार कितनी मज़बूती से अदालत में खड़ी होगी। यह अलग विषय है लेकिन एक महंत ने एक महंत के खिलाफ कार्रवाई की यह बड़ी बात है।
अपने दुसरे कार्यकाल में योगी आदित्यनाथ कुछ बदले बदले नज़र आ रहे हैं। उनके मुसलमानों के समर्थन वाले कुछ बयान भी अखबारों की हैडलाइन बने हैं और अब एक महंत के खिलाफ यह कार्रवाई सीएम योगी के एक नए चेहरे के रूप में देखनी पड़ेगी , हो सकता है इस बदले रूप के पीछे कोई राजनीतिक मंशा हो, 2024 की तैयारी हो मगर जब एक अच्छा काम हुआ है तो उसकी सराहना ज़रूर करनी चाहिए।

