CAA को चुनौती देने वाली सभी याचिकाओं पर शीर्ष अदालत आइंदा 31 अक्टूबर को सुनवाई करेगी मगर उससे पहले SC ने इस मामले में केंद्र सरकार को नोटिस जारी कर चार सप्ताह में जवाब माँगा है. केंद्र को चार सप्ताह का समय इसलिए दिया गया है क्योंकि सरकार की ओर से इन याचिकाओं पर आज हुई सुनवाई में पेश हुए सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने अदालत से कहा कि अभी कुछ जवाब आना बाकी हैं. बता दें कि 2020 में CAA पर रोक लगाने पर सुप्रीम कोर्ट ने इनकार कर दिया था.
सुप्रीम कोर्ट में CAA पर याचिकाओं का अम्बार लगा है, इस पर याचिकाकर्ताओं के वकील कपिल सिब्बल ने सुझाव दिया कि याचिकाओं की छटनी होनी चाहिए, वहीँ एक याचिकाकर्ता एमएल शर्मा ने अदालत में खुद पेश होते हुए कहा कि दलीलों का दोहराव न हो और वकीलों के लिए बहस का समय तय किया जाय. बता दें कि CAA की संवैधानिक वैधता को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर CJI यू यू ललित और जस्टिस एस रवींद्र भट की पीठ सुनवाई कर रही है. आज कुल 220 याचिकाओं पर शीर्ष अदालत में सुनवाई हुई.
दरअसल संशोधित कानून के मुताबिक धार्मिक प्रताड़ना के चलते 31 दिसंबर 2014 तक बांग्लादेश, पाकिस्तान और अफ़ग़ानिस्तान से भारत आए हिन्दू, बौद्ध, जैन, सिख, पारसी और ईसाई समुदाय के लोगों को अवैध प्रवासी नहीं माना जाएगा और उन्हें भारत की नागरिकता दे दी जाएगी. केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में अपना जो प्रारंभिक जवाब दाखिल किया था उसमें कहा गया है कि CAA से किसी भी नागरिक के मौजूदा अधिकारों पर प्रतिबंध नहीं है.केंद्र के मुताबिक चूंकि CAA संसद की संप्रभु शक्ति से जुड़ा हुआ एक मामला है इसलिए अदालत के सामने इस पर कोई सवाल नहीं उठाया जा सकता.

