मुंबई। जमानत मिलने के बाद सेंट्रल मिनिस्टर नारायण राणे फिलहाल राहत की सांस ले रहे होंगे। बहरहाल, उनकी अरेस्टिंग के इस प्रकरण से राजनीति जगत भी भौचक है। महाराष्ट्र के सीएम उद्धव ठाकरे के खिलाफ बेजा बयान के मामले में उन्हें पुलिस ने अरेस्ट किया। राणे सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्योग मंत्री हैं।
केन्द्रीय मंत्री नारायण राणे को महाराष्ट्र पुलिस ने मंगलवार दोपहर में अरेस्ट करने के बाद उन्हें रायगढ़ जिले के महाड दीवानी कोर्ट में पेश किया था। पुलिस ने कोर्ट से एक सप्ताह की रिमांड मांगी थी। हालांकि राणे और उनके शुभचिंतकों को राहत तब मिली जबकि, दलीलें सुनने के बाद कोर्ट ने उन्हें जमानत दे दी। नारायण राणे को जमानत मिलने पर उनके भाजपा समर्थकों में खुशी की लहर दौड़ गई।
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एक ओर गिरफ्तारी और कोर्ट में सुनवाई के दौरान नारायण राणे अचानक अस्वस्थ हो गये थे वहीं उनकी पत्नी नीलम राणे के भी चेहरे पर भारी तनाव देखा गया। असल में राणे को अरेस्ट करने के बाद उन्हें काफी देर संगमेश्वर पुलिस स्टेशन और बाद में महाड पुलिस स्टेशन में रखा गया था। महाड में उनके खिलाफ एक और केस दर्ज हुआ है। राणें की ओर से कोर्ट में अग्रिम जमानत की याचिका दायर की थी। जिसे अदालत ने रद्द कर दिया था।
कुल मिलाकर देश की किसी स्टेट गवर्नमेंट का किसी सेंट्रल मिनिस्टर को अरेस्ट करने का यह एक खास मामला है। बीते दो दशकों में राणे ऐसे पहले संट्रल मिनिस्टर हैं जिनकी अरेस्टिंग हुई है। अब लोग संविधानिक नियम-कानूनों को लेकर बहस कर रहे हैं कि क्या कोई स्टेट गवर्नर किसी सेंट्रल मिनिस्टर को अरेस्ट करवा सकती है? और ऐसा हो सकता है तो किस नियम अथवा औपचारिकता पूरी करने के बाद?
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