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कश्मीर में शांति का नया अध्याय: 30 साल में पहली बार आतंक की एक भी वारदात बिना बीता मई

kashmir

कभी एक महीने में 300 तक होती थीं मौतें, अब आतंकवाद से जुड़ी हत्या का आंकड़ा शून्य
2001 में 4,000 से ज्यादा जानें गई थीं, 2026 में अब तक सिर्फ 12 मौतें दर्ज

श्रीनगर। जम्मू-कश्मीर ने मई 2026 में एक ऐसा पड़ाव हासिल किया है, जिसे कुछ वर्ष पहले तक असंभव माना जाता था। तीन दशक से अधिक समय से आतंकवाद की चुनौती झेल रहे इस केंद्र शासित प्रदेश में पहली बार पूरा मई महीना आतंकवाद से जुड़ी किसी भी हत्या के बिना गुजरा। सुरक्षा एजेंसियां इसे लंबे समय से चल रहे आतंकवाद विरोधी अभियानों और मजबूत सुरक्षा तंत्र का परिणाम मान रही हैं।

आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक, वर्ष 2026 के शुरुआती पांच महीनों में आतंकवाद से संबंधित कुल 12 मौतें दर्ज की गई हैं। इनमें नौ आतंकवादी, एक सुरक्षाकर्मी, एक संदिग्ध स्थानीय व्यक्ति और एक अज्ञात शख्स शामिल है। उल्लेखनीय बात यह है कि इस वर्ष अब तक किसी भी नागरिक की आतंकवादी हिंसा में जान नहीं गई है।

यदि बीते वर्षों के आंकड़ों पर नजर डालें तो यह बदलाव और अधिक स्पष्ट दिखाई देता है। वर्ष 2000 और 2001 में मई महीना आतंकवाद के लिहाज से बेहद खूनी साबित हुआ था। उस दौरान एक ही महीने में करीब 300 लोगों की मौत दर्ज की गई थी। घाटी में लगभग रोजाना मुठभेड़, हमले और हिंसक घटनाएं होती थीं। नागरिकों, सुरक्षाकर्मियों और आतंकवादियों की बड़ी संख्या में जान जाती थी।

इसके बाद धीरे-धीरे हालात बदलने लगे। सुरक्षा बलों की सक्रियता, खुफिया सूचनाओं के बेहतर उपयोग और सीमापार घुसपैठ पर नियंत्रण ने आतंकवादी नेटवर्क को कमजोर किया। हालांकि कुछ वर्षों में स्थानीय उग्रवाद और आतंकी भर्ती बढ़ने से हिंसा में उतार-चढ़ाव भी देखने को मिला, लेकिन समग्र रूप से मौतों का ग्राफ लगातार नीचे आता गया।

वार्षिक आंकड़े भी इस बदलाव की पुष्टि करते हैं। वर्ष 2001 में जम्मू-कश्मीर में आतंकवाद से जुड़ी 4,011 मौतें दर्ज हुई थीं, जो विद्रोह के इतिहास के सबसे हिंसक वर्षों में से एक था। इसके मुकाबले 2026 में अब तक केवल 12 मौतें हुई हैं। नागरिक हताहतों की संख्या शून्य और सुरक्षाबलों की मौत केवल एक रह जाना सुरक्षा व्यवस्था में आए बड़े बदलाव का संकेत माना जा रहा है।

अधिकारियों का कहना है कि आतंकवाद का खतरा पूरी तरह समाप्त नहीं हुआ है और सुरक्षा बल लगातार सतर्क हैं। संवेदनशील इलाकों में अभियान जारी हैं, लेकिन मई का आतंकमुक्त गुजरना इस बात का प्रमाण है कि जम्मू-कश्मीर में शांति और स्थिरता की दिशा में महत्वपूर्ण प्रगति हुई है। यह उपलब्धि आने वाले समय के लिए उम्मीद और विश्वास का नया संदेश लेकर आई है।

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