अहमदाबाद। Gujarat Chunavi Dangal: गुजरात की राजनीति में प्रधानमंत्री नरेद्र मोदी के बाद अगर कोई ताकतवर बनकर उभरा है तो वो हैं भाजपा के राजनीतिक चाणक्य अमित शाह। लेकिन भाजपा के इस राजनीतिक चाणक्य को कांग्रेस के दिग्गज नेता अहमद पटेल कई बार गुजरात में राजनीति के मैदान में धूल चटा चुके हैं। अहमद पटेल भले ही आज इस दुनियां में नहीं हैं लेकिन वो गुजरात की राजनीति में कांग्रेस के प्रमुख स्तंभ में से एक रहे। जब तक अहमद पटेल गुजरात राजनीति में दखल रखते रहे उन्होंने भाजपा के चाणक्य अमित शाह को पैर नहीं जमाने दिए।
आजादी के बाद से कांग्रेस की देश में सरकार रही है। 1977 के आम चुनाव में कांग्रेस को जब जनता दल से करारी हार मिली तो कांग्रेस के एकमात्र ऐसे नेता अहमद पटेल थे। जिन्होंने 26 साल की उम्र में इस चुनाव में जीत हासिल कर इंदिरा गांधी का सिर फक्र से ऊंचा कर दिया था। अहमद पटेल की जीत से इंदिरा गांधी सहित कांग्रेस के धुरंधरों को धक्का लगा था। उसके बाद से गुजरात की राजनीति में अहमद पटेल का वर्चस्व बढ़ता गया। सरकार किसी भी रही हो लेकिन अहमद पटेल की चुनौती को ना तो तत्कालीन मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी स्वीकार करने की हिम्मत कर पाए और ना ही भाजपा के चाणक्य अमित शाह। सबसे बड़ी बात ये कि अहमद पटेल और अमित शाह दोनों ही एक दूसरे को फूटी आंख नहीं भाते थे। बताया जाता है कि कांग्रेस ने पटेल के इशारे पर कई बार अमित शाह को घेरा था।
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राजनीतिक जानकारों की माने तो गुजरात में पटेल समुदाय को भाजपा के खिलाफ खड़ा करने वाले अहमद पटेल ही थे। 2019 के आम चुनाव में दोनों में कड़ी टक्कर देखने को मिली। बता दें कि अहमद पटेल कांग्रेस के ऐसे नेता थे जिन्होंने गुजरात की अलग-अलग सीटों से सात बार लोकसभा का चुनाव जीता और संसद में पहुंचे। वो तीन बार लोकसभा सांसद रहे और चार बार राज्यसभा के सांसद बने।उन्होंने भाजपा के दिग्गज नेता बलवंत सिंह को हराकर चुनाव जीता था। कांग्रेस में अहमद पटेल की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण मानी जाती थी। पार्टी गुजरात के हर मामले में अहमद पटेल की राय लेती थी।

