Gujarat Chunavi Dangal : कोतवाल की राजनीति अवसरवाद और विश्वासघात

 
कोतवाल की राजनीति अवसरवाद और विश्वासघात
गुजरात में होने वाले विधानसभा चुनाव का समय नजदीक आता जा रहा है। सभी राजनीतिक दल जनता को लुभाने के लिए अपने चक्रव्यूह को रचने लगे हैं। वही अगर हम बात भाजपा की करें तो यह कांग्रेस की रीढ़ तोड़ने की फिराक में है। गुजरात कांग्रेस के आदिवासी नेता और तीन बार के विधायक अश्विन कोतवाल ने भाजपा का दामन थाम लिया है जिसके बाद गुजरात कांग्रेस में हलचल मची हुई है। क्योंकि कोतवाल कांग्रेस के मजबूत विधायक थे और उन्होंने कांग्रेस के लिए आदिवासी समुदाय का वोट बैंक बांध कर रखा था।


कांग्रेस के बारे में यह क्या बोले कांग्रेस विधायक:-


अश्विन कोतवाल ने भाजपा परिवार का हिस्सा बनने के बाद स्पष्ट किया है कि आदिवासी समाज कांग्रेस की नीतियों से असंतुष्ट है। वह कांग्रेस की पर अब उतना विश्वास नहीं जता सकती जितना उसे जताना चाहिए। इसके साथ ही कांग्रेस की अंदरूनी कलह कहीं न कहीं जनता के मध्य गलत संदेश प्रस्तावित कर रही है जो कांग्रेस की रीढ़ को कमजोर कर रहा है।


कोतवाल की राजनीति अवसरवाद और विश्वासघात की राजनीति:-


गुजरात कांग्रेस कमेटी के प्रवक्ता मनीष दोषी ने कहा कोतवाल की राजनीति अवसरवाद और विश्वासघात की राजनीति है। ऐसे लोग आदिवासियों का हित नहीं चाहते और अपने स्वार्थ के चलते यह लोग अन्य समुदाय के लोगो के साथ शामिल हो जाते है। यह विकल्प के तौर पर उन्हें चुनते हैं जो इनके जैसी नीतियों वाला होता है। 


भाजपा का आदिवासी मिशन:-

अगर हम भारतीय जनता पार्टी की बात करें तो इस समय वह आदिवासी समाज को लुभाने के लिए ताना बाना बुनने में जुटी है। क्योंकि पिछली बार के चुनाव में भाजपा को आदिवासी समाज से समर्थन नहीं मिला था वही कांग्रेस को आदिवासी समाज ने काफी मदद दी थी। लेकिन इस बार भाजपा पूर्णतः आदिवासी समाज को लुभाने में लगी हुई है। वही अब चुनाव के बीच आश्विन कोतवाल का यू भाजपा में शामिल होना कांग्रेस के लिए बड़ी चुनैती बना हुआ है।