मेरी नजर में कहानी ही फिल्म की हीरो होती है – राकेश श्रीवास्तव

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मेरी नजर में कहानी ही फिल्म की हीरो होती है – राकेश श्रीवास्तव

Zeba Hasan

पिछले 29 साल से टीवी, फिल्म और अब वेब सीरीज के जरिए बॉलीवुड में अपना सिक्का जमा चुके ऐक्टर राकेश श्रीवास्तव ने कई यादगार किरदार निभाए हैं। लेकिन आज भी दर्शक उनका ‘लल्लन जी’ का किरदार भूल नहीं पाए हैं। ‘हमसे तो किसी ने कहा ही नहीं’ गले में छोटी टाई लगाए हुए लापतागंज के लल्लन जी का यह डॉयलाग भी किरदार के साथ सबकी जुबान पर था। हालांकि इन दिनों राकेश श्रीवास्तव (Rakesh Srivastava) फिल्मों के साथ वेब सीरीज और कॉरपोरेट फिल्मों में काफी व्यस्त रहते हैं। 7 अप्रैल को उनकी फिल्म दसवीं ओटीटी प्लेटफॉर्म पर रिलीज हो रही है। इस नई फिल्म को लेकर हमने की उनसे यह खास बातचीत।

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देशभक्तों के साथ परवान चढ़ेगी कहानी

मेरी नजर से अगर मैं फिल्म दवसीं की बात करूं तो मुझे इस फिल्म ने रंग दे बसंती की याद दिला दी है। जिस तरह रंग दे बसंती में हमारे देश के फ्रीडम फाइटर्स को कंटम्प्रेरी अंदाज में दिखाया गया था कुछ वेसा ही अंदाज दर्शकों को दसवीं में भी देखने को मिलेगा। शायद कुछ लोगों को इस कानून के बारे में नहीं पतार होगा कि जिस वक्त बा मशक्कत जेल की सजा होती है उस वक्त उस मुजरिम से को उसके हिसाब से काम दिया जाता है। और इस फिल्म में जब एक चीफ मिनिस्टर को फंसाया जाता है, उसे जेल होती है और उससे उसकी एजुकशन पूछी जाती है तो वह यही कहता है कि मैं आठवीं पास हूं और दसवीं पढ़ना चाहता हूं। जब यह मुख्यमंत्री दसवीं की पढ़ाई जेल में करता है तो देश के महान क्रांतीकारियों के बारे में पढ़ता है। दसवीं की यह पढ़ाई उसका विजन पूरी तरह से बदल देती है। यही है दसवीं नाम के पीछे की कहानी।

मूछों से मिल गया रोल

क्रांति की कुछ कहानियां पर्दे पर नजर आएंगी। इसमें एक नाम लाला लाजपथ राय का भी है और लाला लाजपथ राय का किरदार मैंने निभाया है। क्विट इंडिया मूवमेंट के तहत जो भूमिका लाला जी की रही है उसी को दर्शाया गया है। एक छोटा रोल है लेकिन दमदार है। जहां तक सवाल इस किरदार के मुझे मिलने का है तो आज कल मैंने मूछें बढ़ाई हुई हैं। फिल्म के डायरेक्टर तुषार जलोटा मुझे जानते थे पहले से और जब उन्होंने मेरे इस लुक को देखा तो उन्हें मेरे अंदर लाला लाजपथ राय नजर आ गए। उन्होंने मुझे बुलाया और कहा कि यह रोल करना है।

अभिषेक ने कमाल किया है

फिल्म में अभिषेक बच्चन मुख्य भूमिका में हैं। उन्होंने हरियाणवीं मुख्यमंत्री का किरदार निभाया है। इस रूप में दर्शक उन्हें देखकर हैरान हो जाएंगे। कमाल का काम किया है अभिषेक ने। चाहे हरियाणवी भाषा का इस्तेमाल हो या फिर एक राजनेता की बॉडी लैंगवेज किरदार की हर बारीक से बारीक चीज पर उनका काम देखने लायक होगा। इस बार दर्शक उनके काम को देखकर हैरान भी हो सकते हैं। इस फिल्म में अभिषेक के काम को देखकर अमिताभ जी ने भी उनकी तारीफ कुछ खास अंदाज में की है। मुझे तो बहुत ही अच्छा लगा उनके साथ यह फिल्म करके।

पहले दिन देखी थी ‘द कश्मीर फाइल्स’

कभी कोई फिल्म मैंने राजनीति ऐंगल से नहीं देखी और द कश्मीर फाइल्स (The Kashmir Files) के लिए भी ऐसा ही है। यह फिल्म मैंने पहले दिन देखी थी और इसका सबसे बड़ा कारण था इस फिल्म में मेरे दोस्तों का होना। अनुपम खेर जी बीएनए में मेरे सीनियर रहे हैं। दर्शन को मैं बहुत अच्छी तरह से जानता हूं, और फिल्म देखने के बाद मुझे यही लगा कि वाकई एक अच्छी फिल्म बनाई है। फिल्म में सभी कलाकारों को साबित करने का बहुत अच्छा मौका मिला है। फिल्म देखने के बाद मैंने दर्शक को फोन करके उनके अच्छे काम की बधाई दी और कहा था कि तुमने जिस अंदाज में स्पीज दी है उसने मुझे बच्चन साहब की फिल्म मैं आजाद हूं कि याद दिला दी। बच्चन सर ने भी उस फिल्म के आखिर में एक यादगार स्पीच दी थी और मुझे लगता है कि अगर दर्शन की यह स्पीज को देख लें तो पूरी फिल्म का सार समझ आ जाएगा।

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बड़ी फिल्में नकार दी गई हैं

वक्त के साथ दर्शकों का नजरिया काफी बदल चुका है। सिर्फ बड़े बजट की, बड़े बड़े सितारों वाली फिल्में सफलता का पैमाना नहीं रह गई हैं। इसका उदाहरण कई ऐसी फिल्मों का दर्शकों द्वारा नकारा जाना है जिन्हें हिट माना जा रहा था। ‘द कश्मीर फाइल्स’ जैसी छोटे बजट की फिल्में अगर चलती है उसका सीधा मतलब यही है कि दर्शक अच्छी कहानी सुनना देखना पसंद करते हैं। मेरी नजर में तो हमेशा फिल्म की कहानी ही हीरो रही है। हीरोइज्म जैसी किसी चीज को मैं नहीं मानता। अब कंटेंट ही हीरो है।

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