Politics News : JDU से निकाले गए प्रशांत किशोर पांडेय ने आखिर कैसे पाई चुनावी राजनीति में महारत

 
प्रशांत किशोर pk

मेरठ। चुनावी राजनीति में अपनी महारत का लोहा मनवाने वाले पीके उर्फ प्रशांत किशोर पांडेय ने यूं ही नहीं यहां तक सफर तय किया। कभी बिहार में प्रशांत किशोर को सियासी गलियारों का महारथी कहा जाता था। उनके ऊपर नीतिश कुमार का हाथ था। बिहार के बक्सर में जन्में प्रशांत किशोर को जब जेडीयू से बाहर कर दिया गया तो उन्होंने अपने दम पर कुछ करने की सोची और उसके बाद बस बन गए चुनावी राजनीति में महारत हासिल करने वाले रणनीतिकार।

2015 ​के चुनाव में उन्होंने महागठबंधन को जीत दिलाई तो उनका लोहा उनके विपक्षियों ने माना। प्रशांत किशोर उर्फ पीके की सूझबूझ और उनकी रणनीतिक के बल पर कई राजनेता मुख्यमंत्री तक बन चुके हैं। वर्ष 2015 में जब बिहार चुनाव में उन्होंने नीतीश कुमार को जीतने में मदद की। इसका इनाम उन्हें पार्टी का राष्ट्रीय उपाध्यक्ष बनाकर दिया गया। इतना ही नहीं प्रशांत किशोर को बिहार में कैबिनेट मंत्री का दर्जा मिला। 

Also Read : Gujarat chunavi dangal: गुजरात में शुरू होने वाला टॉप लीडरों के दौरों का दौर

नीतीश कुमार के अभियान जनसंपर्क के नारों 'हर-घर दस्तक' , 'बिहार में बहार है, नीतीशे कुमार है' के पीछे भी पीके ही थे। बताया जाता है कि बिहार में एक दूसरे के धुर विरोधी जेडीयू-आरजेडी-कांग्रेस का महागठबंधन बनाने में पीके की विशेष भूमिका रही थी। 1977 में जन्में प्रशांत किशोर का जन्म जिला बक्सर में हुआ। पीके की मां बलिया की और उनके पिता बिहार सरकार में सरकारी चिकित्सक हैं। पीके की पत्नी जाह्नवी दास असम के गुवाहाटी में डॉक्टर हैं। 

प्रशांत किशोर का चुनावी राजनीति करियर 2014 में चमका जब मोदी सरकार सत्ता में आई। इस चुनाव में पीके को भाजपा का बेहतरीन चुनावी रणनीतिकार बताया गया। माना तो यह भी जाता रहा है कि पीके पर्दे के पीछे से भाजपा की हर चुनावी रणनीति को अंजाम देते रहे हैं। इसी कारण से भाजपा आज भी पीके को सबसे अधिक भरोसेमंद मानती है। शायद कांग्रेस में पीके की एंट्री न होने का के कारणों में एक कारण यह भी रहा। 


ऐसे हुई नरेंद्र मोदी और पीके की मुलाकात :

पीके उर्फ प्रशांत किशोर पांडे अफ्रीका में संयुक्त राष्ट्र की नौकरी कर रहे थे। 2011 में गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी की मुलाकात अफ्रीका में पीके से हुई तो मोदी इस युवक से काफी प्रभावित हुए। इसके बाद मोदी के कहने पर ही पीके अफ्रीका से नौकरी छोड़कर मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी की टीम से जुड़ गए। यही वह दौर था जब पीके ने राजनीति में अपना ब्रांडिंग दौर शुरू किया। चुनाव में किसी नेता के प्रचार का ऐसा दौर शायद ही किसी ने देखा हो। जैसा कि 2014 में पीके ने मोदी को प्रधानमंत्री बनाने के लिए कर दिखाया। प्रशांत किशोर ने इसी 2014 में सिटीजन फॉर अकाउंटेबल गवर्नेंस नाम से एक एनजीओ बनाया। इसे भारत की पहली राजनीतिक एक्शन कमिटी बताया जाता है। पीके के इस एनजीओ में आईआईटी,आईआईएम में पढ़ने वाले प्रोफेशनल्स शामिल थे।

Also Read : Uttarakhand News : चंपावत उपचुनाव में इस महिला प्रत्याशी पर कांग्रेस ने खोल दांव, बढ़ी सीएम धामी की मुश्किल

प्रशांत ने मोदी की मार्केटिंग ऐसी की जिससे वे विश्व स्तर पर छा गए। ​जैसे चाय पे चर्चा, रन फॉर यूनिटी, 3डी रैली, मंथन जैसे कार्यक्रम का श्रेय पीके को दिया जाता है। पीके अब इंडियन पॉलिटिकल एक्शन कमेटी के नाम का एनजीओ चलाते हैं। जो सियासी रणनीति, लीडरशिप, मैसेज कैंपेन के अलावा भाषणों की ब्रांडिंग का काम करती है।