Inside Story - रियल मास्टर, बिहार और PK

 
Prashant Kishor on Bihar Politics

अमित बिश्‍नोई

चुनावी रणनीतिकार प्रशांत किशोर ने कांग्रेस पार्टी के प्लेटफॉर्म पर चढ़ने में नाकाम होने के बाद अपने नए राजनीतिक सफर का एलान कर दिया है जो बिहार से शुरू होने जा रहा है, यह बात किसी और ने बल्कि प्रशांत किशोर ने खुद अपने सोशल मीडिया प्लेटफार्म पर कही है. PK ने कहा कि अब रियल मास्टर यानि जनता के पास जाने का समय आ गया है. प्रशांत किशोर के आज के ट्ववीट में कई संभावनाएं छुपी हुई हैं. वह किसी नए दल या पुराने दल में जा सकते हैं या फिर अपनी पार्टी बना सकते हैं, जब तक कुछ स्पष्ट नहीं हो जाता प्रशांत किशोर के आज के ट्वीट के बाद तो अब कयासों का दौर चलेगा। 

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पिछले बंगाल चुनाव के दौरान प्रशांत किशोर यह बात कही थी कि उनकी भूमिका बदलने वाली है, अब वह चुनावी रणनीतिकार के रूप में रिटायरमेंट लेकर सक्रीय राजनीती में एक विशेष भूमिका निभाना चाहते हैं. और वह यह भूमिका कहाँ और किस रूप में शुरू करेंगे इसका खुलासा वह मई 2022 के शुरू में कर देंगे और आज उन्होंने अपने उसी वादे के हिसाब से यह संकेत दिया है। 

प्रशांत किशोर रियल मास्टर यानि जनता के पास किस रूप में जायेंगे इसका कुछ कुछ इशारा बिहार की राजनीती से मिलने लगा है, यकीनन बिहार की राजनीती की बात होगी तो केंद्र बिंदु में मुख्यमंत्री नितीश कुमार का नाम ज़रूर आएगा। खबर है कि प्रशांत किशोर अपने पुराने क्लाइंट और राजनीतिक गुरु नितीश कुमार से जल्द मिलने वाले हैं. सभी को मालूम है कि कभी नितीश और प्रशांत किशोर के बहुत अच्छे सम्बन्ध थे, इतने अच्छे कि नितीश ने उन्हें पार्टी का उपाध्यक्ष बना दिया। बहरहाल हालात बदले और नीतीश और PK में दूरियां बढ़ीं, पर इतनी भी नहीं कि वापसी न हो सके. राजनीति में परमानेंट कुछ नहीं होता। राजनीति के एक ही स्कूल में पढ़ने वाले लालू और नितीश अलग हो सकते हैं तो PK और नितीश दोबारा मिल भी सकते हैं. सबकुछ ज़रुरत पर निर्भर करता है, किसको किसकी कितनी ज़रुरत है और यही ज़रुरत ही  राजनीतिक रिश्तों को तोड़ती है और जोड़ती भी, इसलिए हैरानी किसी बात पर भी नहीं होनी चाहिए। 

जहाँ तक जनता के बीच प्रशांत किशोर के अकेले जाने की बात है तो वह प्रैक्टिकली संभव नहीं दिख रहा है, संभव होता तो PK अपनी पहली कोशिश में इसको संभव कर दिखाते। प्रशांत किशोर एक चुनावी रणनीतिकार हैं इसलिए काफी प्रैक्टिकल और सच्चाई को समझने वाले व्यक्ति भी हैं, उन्हें मालूम है कि बिना बैकग्राउंड कोई भी राजनीतिक पार्टी खड़ी करना कितना मुश्किल है. है अगर भाग्य आपके साथ हो और कोई अन्ना हज़ारे आंदोलन चलाये और कोई केजरीवाल बनकर उस आंदोलन का राजनीतिक शोषण कर ले. गुरु गुड़ ही रह जाय और चेला शक्कर बन जाय, तो बात अलग है. भ्रष्टाचार के खिलाफ अन्ना आंदोलन के बाद अन्ना की साख खुद इतनी खराब हो गयी है कि अब कोई नए अन्ना पर भरोसा भी नहीं करेगा।

PK अगर जनता के बीच जाने के लिए खुद की पार्टी नहीं बनाएंगे या फिर नितीश से हाथ नहीं मिलाएंगे तो फिर उनके पास बिहार में एक ही विकल्प बचता है और वह है राजद। राजद और कांग्रेस के रिश्ते भी विधानसभा चुनाव के जैसे नहीं रहे. चुनाव बाद ही दोनों पार्टियों के रिश्तों में खटास है, तेजस्वी ने कांग्रेस पर आरोप भी लगाया था कि कांग्रेस पार्टी ने चुनाव को ढंग से नहीं लड़ा, PK ने कांग्रेस को दिए प्रेजेंटेशन में बिहार में अकेले चुनाव लड़ने की बात कही थी, तब उनकी रणनीति कुछ और थी अब चूंकि कांग्रेस पार्टी से उनका वियोग हो चूका है तो रणनीति में बदलाव होना कोई ख़ास बात नहीं, दूसरे प्रेजेंटेशन में PK के प्रस्ताव से यह तो साफ़ ही हो गया है कांग्रेस और राजद की राहें जुदा हो चुकी हैं। 

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दरअसल राष्ट्रीय पार्टी से जुड़ने की मंशा में निराशा हाथ लगने के बाद प्रशांत किशोर के पास किसी क्षेत्रीय पार्टी के साथ जाने के सिवा कोई और चारा नहीं है, बिहार चूंकि उनका गृह राज्य है इसलिए अपनी राजनीतिक पारी की शुरुआत वह यहीं से करना चाह रहे हैं. लेटने के लिए पहले बैठने की जगह बनानी पड़ती है. प्रशांत किशोर ने सीधे लेटने का प्रयास किया मगर नाकाम रहे इसलिए अब बैठने की कोशिश कर रहे हैं, वैसे प्रशांत किशोर का अल्टीमेट गोल तो कुछ और है, इसपर फिर कभी।