यह कैसे कोरोना फाइटर……….

उत्तर प्रदेशयह कैसे कोरोना फाइटर……….

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यह कैसे कोरोना फाइटर……….

मरीज़ों से भी बना रहे दूरी, न दवा दे रहे ,न दिलासा

वायरल वीडिओ खोलते फर्जी कोरोना फाइटरों की पोल

मेरठ। देश भर में फैल रहे कोरोना वायरस से आम जन को बचाने के लिए शासन और प्रशासन की तरफ से किए जा रहे तमाम दावे खोखले व बेमाने साबित हो रहे है। जिसका सबसे बड़ा प्रमाण इस माहमारी के दौर में हो रही वो वायरल वीडियो है,जिनमे मरीजो का ईलाज न होने और भूखा रहने की बात सामने आई। लेकिन अब जो वीडियो सामने आया है, उससे बड़ा सवाल उन कोरोना फाइटरों पर भी खड़ा होता है जो पीपीई किट पहनकर सिर्फ फ़ोटो सेशन तक ही सीमित रह गए है। अधिकारियों की बात करें तो सिर्फ वाहनों का काफिला लेकर निकलने वाले इन अधिकारियों के आदेश और दावे भी अब हवाई साबित हो रहे है।प्रदेश भर में सबसे ज्यादा कोरोना मरीजो के मरने का आँकड़ा मेरठ ने छुआ है,जिसका जिम्मेदार कोई और नही बल्कि प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग की लचर व्यवस्था है।

स्वास्थ्य विभाग की लापरवाही से बढ़ रहा मरीजो का आंकड़ा

मेरठ जनपद में अब तक 200 से ज्यादा कोरोना मरीज मिले है और एक दर्जन से ज्यादा मरीजो की मौत हो चुकी है। इन्ही सब के बीच समय समय पर वीडियो वायरल हुई जिनमे स्वास्थ्य विभाग की लापरवाही को दर्शाया गया। लेकिन प्रशासन के कान पर जूं तक नही रेंगी,जिसका नतीजा यह हुआ कि मरीजो की संख्या लगातार बढ़ती गई और मरने वालों की गिनती में भी इजाफा हो गया। ऐसा प्रतीत होता है कि मेरठ के जिलाधिकारी जो पिछले काफी समय से यहाँ विराजमान है,उनकी जिम्मेदारी सिर्फ मीटिंग में दिशा निर्देश देने और वाहनों के काफिले को लेकर निकलने से ही पूरी हो जाती है। पिछले दिनों शहर में स्थित नवीन सब्जी मंडी में कोरोना पॉजिटिव मिलने के बाद भी लगातार मंडी का संचालन होता रहा। जिसका नतीजा यह हुआ कि मेरठ के अंदर कोरोना मरीजो की संख्या 100 के आंकड़े पर 33 दिन में पहुँची थी तो 200 मात्र आठ दिन में पहुँच गई और अब यह आंकड़ा 245 हो चला है।साथ ही दर्जन भर से ज्यादा मरीजो की मौत हो गई। अब इसका जिम्मेदार प्रशासन को अगर मान लिया जाए तो इसमें कोई संकोच नही होना चाहिए।

मरीज़ों से दूरी बनाने वाले फाइटर नही कोरोना कोढ़ हो रहे साबित

मेरठ में कोरोना मरीजो की देखभाल में लगे डॉक्टरों को कोरोना फाइटर की संज्ञा इसलिए दी गई थी,कि जब कोई भी तीमारदार मरीज के पास नही जा सकेगा तो यह फाइटर उसकी देखभाल करेंगे।लेकिन वायरल हुए एक वीडियो ने इन फाइटरों की भी पोल खोल दी। दरअसल रविवार को जिस कोरोना मरीज पदम सिंह की मौत हुई है, उसकी मौत रात किसी समय हो गई थी,लेकिन कोरोना फाइटर उस पर एक चादर का टुकड़ा तक नही डाल सके। जिससे साबित होता है कि यह फाइटर नही बल्कि कोढ़ है और यह लोग सिर्फ प्रशासन के अधिकारियों को साथ लेकर फ़ोटो खिंचवाने तक ही सीमित है। आज के वाइरल वीडिओ के अलावा
इससे पहले भी कोरोना मरीजो की शिकायत सोशल मीडिया के माध्यम से सामने आती रही है। सुभारती में भर्ती कोरोना मरीजो ने खाना नही मिलने का आरोप लगाया गया था। जिसके बाद अभी हाल ही में एक ऑडियो वायरल हुआ,जिसमें मरीज ने दवाई और खाना न मिलने की बात कही। देहात क्षेत्र के रोहटा में क़वारन टाइन किए गए एक संदिगध ने अपनी एक साल की बच्ची की भूख का हवाला देते हुए फेसबुक पर पोस्ट डाली और समय से मिल रहे खाने के दावे की धज्जियां उड़ा दी। हालांकि लगातार होती फजीहत के बाद मैडिकल में सीसीटीवी कैमरों को लगवाया गया है,जिसके बाद डीएम का दावा है कि वह खुद इसकी निगरानी करेंगे। लेकिन पदम सिंह की मौत के बाद एक बार फिर प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े हो गए है।

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