UP के बिजनौर की विदुरभूमि को पर्यटन स्थल के तौर पर जाना जाता है पर अब वहाँ उत्तर भारत के बड़े आयुर्वेदिक अस्पताल और रिसर्च सेंटर की नीव रखी जा रही है । अब यहां आने के लिए लोगों के पास कई विकल्प होंगे पर्यटन व पौराणिक दृष्टि से लोग विदुर भूमि के दर्शन के लिए आते ही है अब लोग नेचुरोपैथी, आयुर्वेदिक, पंचकर्मा जैसे विधाओं से अपना उपचार कराने यहां आयेंगे। प्रशासन ने इसकी रूप रेखा तैय्यार करनी शुरू भी कर दी है।
बिजनौर का विदुरकुटी महाभारत सर्किट में शामिल है। यह जिला अफसरों और नेताओं की उपेक्षा का शिकार हो गया जिस कारण इसे उचित नाम और विकास नहीं मिल सका। पर अब प्रशासन ने विदुरकुटी को पर्यटन स्थल, पौराणिक व आयुर्वेदिक संस्थान, पंचकर्मा, योग आदि के द्वारा एक नई पहचान देने की तैयारी कर ली
यहां ज्यादतर कार्य जनसहयोग से कराए जाएंगे। जिसके लिए आस्थावान लोगों को इस मुहिम से जोड़ा जाएगा, आयुर्वेद के लिए प्राइवेट कॉलेजों से मदद ली जाएगी, तो सरकारी आयुर्वेदिक विभाग में से कुछ चिकित्सकों की यहां तैनाती भी की जा सकती है।
यँहा बथुए के साग व अर्जुन के छाल की चाय भी मिलेगी ।
कण्व ऋषि की भूमि पर विदुरभूमि के लिए औषधि उगेगी जिससे लोगों का इलाज हो पाएगा ।
विदुरकुटी पर बनने वाले आयुर्वेदिक अस्पताल के लिए आयुर्वेदिक औषधि की व्यवस्था पर भी योजना बनना शुरु हो गई है। कण्व ऋषि आश्रम की भूमि पर औषधी लगाई जायेंगी साथ ही मेडिशनल प्लांट भी लगाए जाएंगे। यहां की औषधि से ही विदुरभूमि पर जाने वाले मरीजों के रोगों का उपचार किया जाएगा

