- नोएडा की फिल्म सिटी के बाहर भारी फोर्स तैनात
- मीडिया के सामने आत्मसमर्पण कर सकता है विकास दुबे
अमित बिश्नोई
उत्तर प्रदेश का दुर्दांत अपराधी बना विकास दुबे पुलिस को नाको चने चबवा रहा है. 40 थाने 73 जिलों की पुलिस 6 दिन बीतने के बाद भी उसे दबोच नहीं सकी है.पुलिस जब तक पहुंचती है तब तक विकास आगे बढ़ चुका होता है. ऐसे में लोगों के जेहन में सवाल है कि इतना बड़ा अपराधी कैसे पुलिस की हर मूवमेंट से एक से तीन स्टेप आगे चल रहा है.चर्चाओं का दौर गर्म है कि क्या पुलिस का मुखबिर तंत्र अब पहले जैसा नहीं रहा.
एक दिन पहले फरीदाबाद के एक होटल में उसके पहुंचने की बात प्रकाश में आई थी. लेकिन वहां भी जब पुलिस पहुंची तो उससे काफी देर पहले वह भाग चुका था. अब कयासों के दौर लग रहे है कि विकास नोएडा सिटी में न्यूज चैनल के आफिस से अपनी बात कहकर सरेंडर कर सकता है. इसकी सूचना मिलने पर नोएडा सिटी में पुलिस फोर्स तैनात की गई है.
शिवली में दो दिन छिपा रहा
बिकरु में पुलिसकर्मियों को मौत के घाट उतारने वाला विकास जघन्य हत्याकांड को अंजाम देने के बाद आराम से घूमता रहा.विकास दुबे के टच में रहने वाले कुछ लोगों को पुलिस ने अरेस्ट किया है. इन लोगों ने चौंकाने वाली बातें बताई है. जिसमें पुलिस की लापरवाही सामने आई है. वारदात को अंजाम देने के बाद साइकिल और फिर बाइकों के सहारे विकास और उसके साथी शिवली पहुंचे.कहा जा रहा है कि वारदात को अंजाम देने के बाद विकास दुबे व उसके दो साथी शिवली में एक दोस्त के घर छिपकर रहे थे. दो दिन यहां गुजारने के बाद ट्रकों में लिफ्ट लेकर अलग-अलग शहर हाेते हुए हरियाणा के फरीदाबाद पहुंचे. इससे यह साफ पता चलता है कि वारदात के बाद कानपुर नगर और कानपुर देहात की पुलिस को विकास मूर्ख बनाता रहा और पुलिस खाक छानती रही.पुलिस की लापरवाही का खुलासा डीजी मुख्यालय से जारी प्रेसनोट में भी किया गया है.इसमें कहा गया कि वारदात के बाद विकास के साथी अलग-अलग रास्तों से फरार हुए.कोई बाइक तो कोई साइकिल से गया. विकास खुद साइकिल से खेतों के रास्ते शिवली पहुंचा था. उसके साथ अमर दुबे और कार्तिकेय भी थे. तीनों भागकर शिवली पहुंचे और दो दिन तक छिपे रहे. उसके बाद कार्तिकेय अलग व विकास-अमर एक साथ बाइक से लखनऊ की ओर रवाना हुए.

