राजस्थान की राजनीती में ऊँट और पहाड़ का खेल चल रहा है, गेहलोत जो कल तक अपने को पहाड़ समझ रहे थे आज उनकी स्थिति ऊँट जैसी हो गयी है. कल तक अपने नुमाइंदों से पार्टी आला कमान को देख लेने की बात कहने वाले राजस्थान के मुख्यमंत्री आज कह रहे हैं कि मैं कभी आला कमान को चुनौती नहीं दूंगा। गेहलोत का ये बयान आज सोनिया गाँधी से मुलाकात के बाद आया है. गेहलोत का यह बयान अपने आप में साबित कर रहा है कि राजस्थान में पिछले दो दिनों बगावत का जो खेल खेला गया उसके पीछे दरअसल वही थे.
बता दें कि राजस्थान की राजनीतिक गहमा गहमी के बीच आज अशोक गेहलोत ने कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गाँधी से मुलाकात की और पिछले दो दिनों में जो कुछ हुआ उसके बारे अपनी सफाई पेश की. दोनों के बीच क्या बातचीत हुई इसपर तो कोई ज़्यादा जानकारी नहीं मिली मगर गेहलोत खुद सोनिया से मुलाकात के बाद यह कहकर कि आला कमान का हर फैसला मंज़ूर है कहकर मामला रफा दफा करने की कोशिश की.
हालाँकि गेहलोत के इस बयान के बाद भी यह ज़रूरी नहीं कि सारा मामला सुलझ गया है , कांग्रेस अध्यक्ष पद को लेकर उनकी उम्मीदवारी पर अभी भी संशय है, हालाँकि कुछ लोग कह रहे हैं कि शायद गेहलोत अभी पूरी तरह रेस से बाहर नहीं हुए हैं हालाँकि cwc के वरिष्ठ नेता अब भी नहीं चाहते कि इतना सब होने के बाद पार्टी अध्यक्ष पद जैसे महत्वपूर्ण पद पर गेहलोत को बिठाया जाय. फिलहाल सोनिया गाँधी का पार्टी के सीनियर नेताओं से मुलाकातों का दौर जारी है। दरअसल इस पूरे घटनाक्रम को सोनिया गाँधी खुद हैंडल कर रही है.

