रेप पीडि़ता को करोड़ों की संपत्ति देने का लगा आरोप
इसी शनिवार को मिली थी जमानत, अब और होंगे परेशान
कभी-कभी ऐसा होता है कि लाख चाहने और प्रयास करने के बाद भी मुश्किलें कम नहीं होती. यह बात इन दिनों पूर्व मंत्री गायत्री प्रजापति पर फिठ बैठ रही है.अखिलेश सरकार में कैबिनेट मंत्री रहे गायत्री प्रजापति की मुश्किलें और बढ़ने वाली हैं. रेप केस में हाल ही में जेल से जमानत पर रिहा हुए प्रजापति के खिलाफ धोखाधड़ी, जालसाजी, जान से मारने की धमकी की धाराओं में एफआईआर दर्ज हुई है.
रेप पीड़िता भी आरोपी
चित्रकूट की रेप पीड़िता को भी मामले में आरोपी बनाया गया है. यह एफआईआर रेप पीड़िता के वकील दिनेश चंद्र त्रिपाठी की ओर से दर्ज करवाई गई है.
वादी ने धोखाधड़ी ,जालसाजी के पुख्ता सबूत पुलिस को दिए हैं. वादी का कहना है कि मामले को -दफा करने के लिए रेप पीड़िता और आरोपी के बीच करोड़ों लेनदेन हुआ है. वकील का आरोप है कि मामले में गायत्री प्रजापति ने पीड़िता को करोड़ों की संपत्ति ट्रांसफर की है, जिसके पुख्ता प्रमाण पुलिस को सौंपे गए हैं.
क्या है पूरा मामला?
चित्रकूट की महिला ने अखिलेश सरकार में मंत्री रहे प्रजापति पर रेप का आरोप दर्ज कराया था, जिसके बाद फरवरी 2017 में सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर गायत्री प्रजापति के खिलाफ केस दर्ज करते हुए गिरफ्तार किया गया था. लेकिन ये मामला उस वक्त पलट गया जब रेप पीड़िता ने कोर्ट में गायत्री प्रजापति के पक्ष में बयान दिए और गवाह रामसिंह के खिलाफ रेप की एफआईआर दर्ज करवा दी.
जिसके बाद 5 सितंबर को पुलिस ने रामसिंह को गिरफ्तार कर लिया. इतना ही नहीं रामसिंह को गिरफ्तार करने में 2 इंस्पेक्टर सत्यप्रकाश सिंह (गौताम्पल्ली) और क्राइम ब्रांच के इंस्पेक्टर अजीत सिंह को सस्पेंड भी किया गया. रामसिंह की गिरफ्तारी में दोनों इंस्पेक्टर की भूमिका संदिग्ध मिली थी.इसस पहले 4 सिंतबर को सामूहिक दुष्कर्म के मामले में जेल में बंद पूर्व खनन मंत्री गायत्री प्रसाद प्रजापति को हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच से जमानत मिल गई थी. 5 लाख के पर्सनल बॉन्ड और दो जमानतदारों की शर्त के साथ गायत्री को जमानत दी गई. 15 मार्च 2017 से जेल में बंद प्रजापति को हाईकोर्ट से 2 महीने की राहत मिली. वे इस दौरान देश छोड़कर बाहर नहीं जा सकते हैं. हाईकोर्ट ने अखिलेश सरकार में मंत्री रहे सामूहिक दुष्कर्म के आरोपी गायत्री प्रजापति को पीड़िता और उसके परिवार के सदस्यों से दूर रहने और उनपर दबाव न बनाने का निर्देश भी दिया.

