- हाथरस के डीएम का वीडियो वायरल, परिजनों को धमकाने का आरोप
- एडीजी लाॅ एंड ऑर्डर प्रशांत कुमार ने दुष्कर्म होने से किया इंकार
सुनील शर्मा
न्यूज डेस्क। उत्तर प्रदेश के हाथरस जिलें में दलित युवती के साथ हुए दुष्कर्म में अब पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों का रवैया हैरान करने वाला है। एक ओर जहां एक वायरल वीडियो में जिले के डीएम पीड़ित परिवार से यह कहते दिखाई दे रहे हैं कि मीडिया आज यहां है, कल नहीं रहेगा। सब चले जाएंगे। आप सरकार की बात मान लो। वहीं दूसरी ओर एडीजी लाॅ एंड ऑर्डर प्रशांत कुमार ने दुष्कर्म की बात को सिरे से नाकार दिया। इन हालातों मेें न्याय कितना और कैसे मिल पायेगा यह कहना मुश्किल है।
पूरे देश को आंदोलित करने वाले हाथरस दुष्कर्म पर अधिकारियों का रवैया या यूं कहें उनके ऊपर बैठे सत्ताधारियों का रवैया हैरान कर देने वाला है। हाथरस जिले में दलित युवती के साथ हुए गैंगरेप मामले में एक वायरल वीडियो में जिले के डीएम प्रवीन लक्षकार पीड़ित परिवार से कह रहे हैं कि अपनी विश्वसनीयता बनाए रखिए। मीडिया आज यहां है, कल नहीं रहेगा। सब चले जाएंगे। आप सरकार की बात मान लो। आप बार-बार बयान बदलकर ठीक नहीं कर रहे हैं। आपकी क्या इच्छा है। क्या पता कल हम ही बदल जाएंगे। वीडियो को देखते ही समझ आ रहा है कि डीएम साहब समझा नहीं रहे बल्कि शालीनता से धमका रहे हैं।
वहीं उत्तर प्रदेश के एडीजी लाॅ एंड ऑर्डर प्रशांत कुमार का कहना है कि एफएसएल रिपोर्ट में रेप की पुष्टि नहीं हुई है। मेडिकल रिपोर्ट में भी रेप की पुष्टि नहीं हुई थी। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में गले की चोट और उसके कारण हुए ट्राॅमा को मौत का कारण बताया गया है। उन्होंने कहा कि पीड़ित या उसकी मां ने दुष्कर्म किये जाने की बात नहीं कही थी। पीड़िता ने एक वीडियो में अपनी जीभ भी दिखाई है जो कटी नहीं थी। एडीजी प्रशांत कुमार ने प्रदेश में जातीय तनाव को भड़काने के लिये यह मुद्दा गलत ढंग से उठाने की बात कही है।
अगर कागजों पर यकीन करें तो न्याय भी सिर्फ कागजों पर ही मिलता दिखाई देगा। पीड़िता के गंभीर हालत में अस्पताल में भर्ती होने के बाद से ही उसकी रीढ़ की हड्डी तोड़े जाने और जीभ काटने के आरोप लग रहे थे मगर पुलिस ने तब इन आरोपों को नकराने की जहमत नहीं उठाई। न ही पुलिस ने उस वक्त पीड़िता की कोई ऐसी वीडियो जारी की जिससे यह पता चले की उसकी जीभ कटी नहीं थी। पीड़िता के गुजर जाने के बाद रात के अंधेरे में भारी पुलिसबल तैनात कर, गांव वालों और उसके परिजनों को दूर रखकर शव का अंतिम संस्कार किया जाना संदेह तो पैदा करता ही है। वहीं अब पुलिस का दुष्कर्म की बात से ही इंकार कर देना जाहिर तौर पर आरोपियों को लाभ पहुंचायेगा। ऐसे में क्या अपनी जान गवां चुकी पीड़िता को न्याय मिल पायेगा। अब तक की पुलिस-प्रशासन की कार्यशैली को देखकर तो संदेह पैदा होता है।

