किसान महापंचायत मे टिकैत ने कृषि कानूनों के साथ देश व प्रदेश से बीजेपी को हटाने का लिया संकल्प

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किसान महापंचायत मे टिकैत ने कृषि कानूनों के साथ देश व प्रदेश से बीजेपी को हटाने का लिया संकल्प

लखनऊ: मुजफ्फरनगर रविवार को संयुक्त किसान मोर्चा द्वारा आयोजित अब तक की सबसे बड़ी महापंचायत का गवाह बना जहाँ लाखों किसान पहुंचे और यहीं से भारतीय किसान संघ (बीकेयू) के नेता राकेश टिकैत ने ग्रामीण आक्रोश और किसानों को एकजुट करके अगले साल उत्तर प्रदेश से भाजपा सरकार को हटाने के अपने संकल्प का ऐलान किया।

राकेश टिकैत जिनका मंच पर पारंपरिक तरीके से जोरदार स्वागत हुआ और मंच से उन्होने यूपी की योगी सरकार को उखाड़ फेंकने तक आंदोलन और किसानों का विरोध जारी रखने की कसम खाई,  हालांकि उन्होने अपने खुद चुनाव लड़ने के बारे में कोई साफ संकेत नहीं दिया ।

टिकैत ने कहा कि भाजपा धर्म के आधार पर तोड़ती हैं और हम लोगो को जोड़ते हैं इस उदाहरण को चरितार्थ करने के लिए उन्होने मंच से “अल्लाहु अकबर” और “हर हर महादेव” के नारे लगवाएँ।

हालांकि विश्लेषको के मुताबिक मौजूदा आंदोलन कृषि कानूनों के खिलाफ संघर्ष के बजाय अब “भाजपा (BJP) हटाओ देश बचाओ” मे बदल गया हैं। राकेश टिकैत ने कहा कि मसला अब केवल किसानों और तीन कृषि कानूनों का नहीं रहा अब मुद्दा देश और संविधान बचाने का है क्योंकि बीजेपी सरकार अपने घोषणापत्र से इतर बिजली, रेल, एयरपोर्ट और एलआईसी (LIC) जैसी सरकारी चीजों को बेच रही हैं। इसलिए सबको आगे आना पड़ेगा और प्रदेश और देश से भाजपा को उखाड़ फेकना होगा।

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बता दे कि एसकेएम Sanyunkta Kisan Morcha (SKM) कृषि संघों के लिए एक मंच है, जो पिछले दस महीनों से तीन कृषि सुधार कानूनों का विरोध कर रहा है और सभी कृषि उपज के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य (Minimum Support Price) के लिए कानूनी गारंटी की मांग कर रहा हैं। पंजाब और हरियाणा के विपरीत, जहां विरोध शुरू हुआ, यूपी में राज्य द्वारा संचालित बाजारों या फसलों की व्यापक सरकारी खरीद का कोई मजबूत मौजूदा ढाँचा नहीं है। इसलिए, राज्य के अधिकांश किसानों के लिए, जो टिकैत समूह का समर्थन करते हैं उनके लिए गारंटीकृत एमएसपी बहुत बड़ा मुद्दा हैं।

टिकैत ने कहा कि “हमने 2019 में भाजपा को वोट दिया क्योंकि उसने हमें एमएसपी (MSP) दरों का वादा किया था जो खेती को लाभदायक बनाएगी। लेकिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हमसे केवल झूठ बोला, अगर अनाज बेचने के लिए मंडियां नहीं रहेंगी और निजी व्यापारी उस दर पर खरीदने से इनकार करते हैं तो एमएसपी घोषित करने का क्या मतलब है?

गौरतलब है कि एसकेएम की नजरे करीब 14 करोड़ बेरोजगार और बढ़ती हुई महंगाई,  गिरती कृषि आय से उत्पन्न गुस्से और निराशा पर टिकी है, एसकेएम को उम्मीद है कि यूपी में किसानों और श्रमिकों के साथ-साथ हिंदुओं और मुसलमानों को भी एकजुट किया जाएगा। महापंचायत के मंच पर बीकेयू अध्यक्ष नरेश टिकैत और मुस्लिम किसान नेता गुलाम जोला एक दूसरे के बगल में बैठे दिखे थे। उन्होंने कहा, मुजफ्फरनगर दंगों के बाद हमारे संबंधों में गिरावट आई थी, लेकिन अब सब कुछ भूलकर आगे बढ़ने का समय है

दिलचस्प बात यह है कि राष्ट्रीय लोक दल, जो टिकैत के समान किसानों के समर्थन पर निर्भर हैं उसने इस पंचायत को बैक-एंड समर्थन प्रदान किया लेकिन उनके नेता जयंत चौधरी मंच पर नहीं थे हालाँकि उनका चेहरा शहर के चारों ओर कई होर्डिंग्स पर था। जहाँ तक पंचायत में पहुंचे किसानों के जनसमूह का हैं तो एक अनुमान के मुताबिक करीब एक से पांच लाख किसान इस पंचायत में पहुंचे थे.

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जबकि बहुत से किसान सभा में प्रवेश नहीं कर सके जहां महापंचायत आयोजित की गई थी और वो मुजफ्फरनगर की सड़कों और राजमार्ग पर खड़े ट्रैक्टरों मे बैठकर एलईडी स्क्रीन के माध्यम से नेताओं को देख और सुन रहे थे।

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