पश्चिम बंगाल में मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और राज्यपाल जगदीप धनकड़ के बीच टकराव अब एक आम बात है, ममता उन्हें राज्यपाल कम भाजपा का एजेंट ज़्यादा मानती हैं वहीँ राज्यपाल धनकड़ भी ममता बनर्जी को घेरने और सवाल उठाने का कोई भी मौका नहीं छोड़ते यहाँ तक कि कभी कभी यह लगता है कि वह राज्यपाल न होकर कोई राजनेता हों. फिलहाल ताज़ी खबर जो सामने आयी है उससे इन दोनों के बीच टकराव होना निश्चित है.
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दरअसल ममता सरकार विधानसभा में एक विधेयक पेश करने वाली है जिसमें पश्चिम बंगाल के सभी यूनिवर्सिटीज का कुलाधिपति राज्यपाल न होकर मुख्यमंत्री को बनाने की बात कही गयी है. राज्य के शिक्षा मंत्री ब्रत्य बसु के मुताबिक इस बिल को मंत्रिमंडल ने मजूरी दे दी है और जल्द ही इस बिल को विधानसभा में पेश किया जायेगा।
पश्चिम बंगाल में इस समय 17 विश्वविद्यालय हैं जिनके कुलाधिपति राज्यपाल महोदय हैं, इन यूनिवर्सिटीज में कलकत्ता विश्वविद्यालय, रवींद्र भारती विश्वविद्यालय, जादवपुर विश्वविद्यालय, विद्यासागर विश्वविद्यालय, कल्याणी विश्वविद्यालय, बर्दवान विश्वविद्यालय और उत्तर बंगाल विश्वविद्यालय शामिल हैं. शांतिनिकेतन में विश्वभारती के लिए प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी चांसलर हैं जबकि राज्यपाल प्रधान या रेक्टर हैं.
यह मामला तब बिगड़ा जब सर्च कमेटी द्वारा चुने गए कुलपतियों के नामों को राज्यपाल धनकड़ ने मंज़ूरी देने से इंकार कर दिया। बता दें कि ममता सरकार ने कहा है कि राज्यपाल की सभी राज्य संचालित यूनिवर्सिटियों के कुलाधिपति होने की “औपनिवेशिक विरासत” की समीक्षा की जानी चाहिए और विद्वानों को नियुक्त किया जाना चाहिए. अब ममता सरकार राज्यपाल से कुलपतियों की नियुक्ति का अधिकार छीनने की तैयारी कर रही है. अब न राज्यपाल न कुलाधिपति रहेंगे और न ही VC की नियुक्तियों या विश्विद्यालयों के अन्य फैसलों पर कोई अड़चन डाल सकेंगे, हालाँकि ममता के लिए यह इतना आसान नहीं है फिर भी ममता तो ममता है.

