नई दिल्ली। विस्तारवादी चीन के रवैये से दुनिया परेशान है। छोटे व कमजोर पड़ोसी देशों पर चीन लगातार अपनी धौंस जमा रहा है। हालांकि भारत के सामने उसकी विस्तारवादी नीति हमेशा से फेल होती रही है। कूटनीति हो या फिर सैन्य कार्रवाई, भारत चीन को हर भाषा में करारा जवाब देता रहा है। ऐसे में अमेरिका भी अब भारत से उम्मीदें कर रहा हैं। चीन की हरकतों को रोकने के लिए अब अमेरिका ने भारत के पक्ष में बड़ा फैसला किया है। अमेरिकी प्रतिनिधि सभा ने राष्ट्रीय रक्षा प्राधिकरण अधिनियम (एनडीएए) में संशोधन प्रस्ताव को अपनी मंजूरी दी है। अब अमेरिकी सांसदों को भारत द्वारा रूस से हथियार खरीदने पर कोई परेशानी नहीं होगी। दरअसल, अमेरिकी सांसद रो खन्ना ने भारत को काट्सा (CAATSA) कानून के अंतगर्त पांबदियों से छूट दिए जाने की मांग काफी पहले की थी।
CAATSA कानून के तहत अमेरिका अपने विरोधी देशों से हथियारों की खरीद के खिलाफ प्रतिबंधात्मक निर्णय लेता है। अमेरिका CAATSA के तहत उन देशों पर भी प्रतिबंध लगाता है जिनका उत्तर कोरिया, ईरान या रूस के साथ लेन देन चलता है। प्रतिनिधि सभा के मंजूरी के बाद यह प्रस्ताव कानून का हिस्सा नहीं है। इसे कानूनी मान्यता देने के लिए प्रस्ताव को अमेरिकी संसद के दोनों सदनों में पास होगा। रूस से एस-500 मिसाइल रक्षा प्रणाली (s-500 missile system) खरीदने के भारत के फैसले के कारण अमेरिका कॉट्सा अधिनियम के तहत कार्रवाई पर विचार कर रहा है। इस मामले में भारत का पक्ष रो खन्ना ने लेते हुए कहा था कि भारत को अपनी रक्षा जरूरतों के लिए रूसी हथियार प्रणालियों की जरूरत है। इसलिए उसे CAATSA के तहत प्रतिबंधों में छूट दी जाए। रूस और चीन की घनिष्ठ साझेदारी को देख हमलावरों को रोकने के लिए ऐसा करना अमेरिका-भारत रक्षा साझेदारी के हित में होगा। भारत ने अक्टूबर 2018 में एस-400 एयर डिफेंस सिस्टम के पांच स्क्वाड्रनों के लिए रूस के साथ 5.43 अरब डॉलर का करार किया था।

