Kashmiri Pandit : कश्मीरी पंडितों के नरसंहार मामले में विचार करने से सुप्रीम कोर्ट का इनकार

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नई दिल्ली। जम्मू-कश्मीर में कश्मीरी पंडितों के नरसंहार की घटना मामले पर दाखिल याचिका पर आज सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई। जिस पर सुप्रीम कोर्ट ने याचिकाकर्ता  वी द सिटीजंस को केंद्र सरकार के पास जाने को कहा है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि इस मामले में पहले केंद्र सरकार के समक्ष रिप्रेजेंटेशन दिया जाए। शीर्ष अदालत ने याचिकाकर्ता से अपनी याचिका वापस लेने के लिए कहा है। बता दें कि सुप्रीम कोर्ट में दायर की गई याचिका में तीन दशक पहले हए हत्याकांडों की जांच के लिए विशेष जांच दल गठित कर उनकी जांच करवाने के अलावा कश्मीर पंडितों के पुनर्वास और संपत्ति वापस दिलाने कि मांग की गई थी ।

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आज सुप्रीम कोर्ट में जस्टिस बीआर गवई और सीटी रविकुमार की पीठ ने याचिका पर सुनवाई की। वी द सिटीजन ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर कश्मीर में 1990 से 2003 तक कश्मीरी पंडितों और सिखों के नरसंहार और अत्याचार की जांच की मांग को लेकर एसआईटी के गठन की गुहार लगाई थी। याचिका में कश्मीर में हिंदुओं के उत्पीड़न और विस्थापितों के पुनर्वास की मांग की गई थी। सुप्रीम कोर्ट ने जम्मू कश्मीर में 1989 से 2003 के बीच हुई हिंदुओं और सिखों की हत्याओं की एसआईटी जांच और विस्थापितों के पुनर्वास की मांग पर विचार करने से आज साफ इनकार कर दिया। सुप्रीम कोर्ट ने याचिकाकर्ता संस्था वी द सिटीजन्स से कहा कि वह इस बारे में पहे केंद्र सरकार को ज्ञापन दे। याचिकाकर्ता के अधिवक्ता वरुण कुमार सिन्हा ने याचिका दायर की थी। जिसमें उन्होंने केंद्र और जम्मू-कश्मीर सरकार से 90 के दशक में हुए नरसंहार के बाद भारत के विभिन्न हिस्सों में रहने वाले हिंदुओं और सिखों की जनगणना करने का निर्देश देने का अनुरोध भी किया था। इसमें कहा गया था कि एक एसआईटी का गठन किया जाए। जो कि 1989 से 2003 के बीच जम्मू-कश्मीर में हिंदुओं और सिखों के नरसंहार में शामिल रहे और आरोपियों की मदद करने वाले और उकसाने वालों की पहचान की जाए। एसआईटी की उसी रिपोर्ट के आधार पर उन पर मुकदमा चलाने का निर्देश दिया जाए।

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