Gujarat Chunav Dangal: गुजरात में होने वाले विधानसभा चुनाव के लिए जहां सभी राजनीतिक दलों ने अपनी कमर कस ली है वही कांग्रेस के अस्तित्व पर लोग आज सवाल उठा रहे हैं और लोगो का कहना है कि कांग्रेस को इस समय एक मजबूत लीडर की आवश्यकता है जो कांग्रेस की डूबती नैया को पार लगा सके। लेकिन अगर हम कांग्रेस के इतिहास की बात करे तो कांग्रेस परिवार के सियासी गठजोड़ ने जनता को खूब लुभाया है। इंदिरा गांधी के नेतृत्व में जब कांग्रेस की नैया डगमगाई तो एक स्लोगन ने इंदिरा को जनता के बीच अनोखी पहचान दिलाई और विपक्षी दलों को उनके स्लोगन के बल ने मात दे दी।
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क्यों गुजरात के लिए आवश्यक है 1971 का इतिहास
वर्ष 1971 कांग्रेस और इंदिरा गांधी के लिए काफी अहम रहा है। क्योंकि इस साल न सिर्फ विधानसभा चुनाव हुए बल्कि भारत पाकिस्तान के बीच युद्ध भी हुआ था। कांग्रेस टूट रही थी और इंदिरा गांधी के हाँथो से सत्ता जा रही थी। इंडिया गांधी को वैसे तो जनता के बीच पकड़ बनाने का कोई जरिया नहीं दिख रहा था लेकिन उनकी सूझ बूझ ने उन्हें महिलाओं के बीच एक मजबूत लेडी के रूप में प्रस्तुत किया था। जब चुनाव होना था तो इंदिरा गांधी के विरोध में उनके सभी समर्थक खड़े हो गए और 12 नवंबर 1969 में प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी को कांग्रेस से बाहर का रास्ता दिखा गया। उनपर यह आरोप लगाया गया कि उन्होंने अनुशासन का उलंघन किया है और गुजरात की राजनीतिक गरिमाओ को तोड़ा है।
कांग्रेस से अलग होकर इंदिरा गांधी बौखला उठी उन्होंने नई पार्टी कांग्रेस (आर) बनाई। सिंडिकेट ने कांग्रेस (ओ) का नेतृत्व किया। नई पार्टी का इंदिरा गांधी ने अपने बलबूते पर प्रचार किया और गुजरात की जनता को एक नया मुद्दा दिया गरीबी हटाओ। इंदिरा का गरीबी हटाओ का स्लोगन घर घर गूंजने लगा और इस पैंतरे ने पूरे गुजरात मे इंदिरा गांधी के नाम को विख्यात कर दिया और जनता इंदिरा गांधी का गुणगान करने लगी व गुजरात मे इंदिरा गांधी की वापसी हुई।
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इंदिरा हटाओ पर भारी पड़ा गरीबी हटाओ
विपक्ष इंदिरा गांधी का जमकर विरोध कर रहा था विपक्ष का कहना था कि इंदिरा गांधी ने गुजरात की राजनीति को बदला है। विपक्ष की यह बात काफी हद तक सही भी थी क्योंकि इंदिरा गांधी ने राजनीति में कई नए एक्सपेरिमेंट किये। विपक्ष ने जनता को लुभाने के लिए इंदिरा हटाओ का स्लोगन उठाया और गुजरात मे अपना चुनावी प्रचार आरंभ किया लेकिन इंदिरा ने विपक्ष की इस चाल को मात देने के लिए गरीबी हटाओ के स्लोगन का सहारा लिए और राजनीति में एंट्री की इंदिरा का यह सोलगन जनता के दिलो दिमाग मे छा गया और जनता ने इंदिरा गांधी का समर्थन किया और इंदिरा की गुजरात मे सरकार बनी।
इंदिरा के गरीबी हटाओ के स्लोगन ने गुजरात ही नहीं हर ओर कांग्रेस को जीत का स्वाद चखाया। इंदिरा के नेतृत्व वाली कांग्रेस नेे लोकसभा की 545 सीटों में से 352 सीटें जीतीं। जबकि कांग्रेस (ओ) के खाते में सिर्फ 16 सीटें ही आई। भारतीय जनसंघ ने चुनाव में 22 सीटें जीतीं। सीपीआई ने चुनाव में 23 सीटें जीतीं। जबकि सीपीआईएम के खाते में 25 सीटें आईं। प्रजा सोशलिस्ट पार्टी ने 2 सीटें जीतीं जबकि संयुक्त सोशलिस्ट पार्टी के खाते में 3 सीटें आईं। स्वतंत्र पार्टी के खाते में सिर्फ 8 सीटें आई।

