नयी दिल्ली: भारत की मुद्रास्फीति संतोषजनक स्तर से काफी ऊंची है। मूडीज एनालिटिक्स ने मंगलवार को कहा कि ईंधन के ऊंचे दाम खुदरा महंगाई दर पर दबाव बनाये रखेंगे। इससे भारतीय रिजर्व बैंक के लिये नीतिगत दर में आगे कटौती मुश्किल होगी।
खुदरा मुद्रास्फीति फरवरी में बढ़कर 5 प्रतिशत पहुंच गयी जो जनवरी में 4.1 प्रतिशत थी। रिजर्व बैंक मौद्रिक नीति पर विचार करते समय मुख्य रूप से खुदरा मुद्रास्फीति पर गौर करता है। मूडीज एनालिटिक्स ने कहा कि मुख्य मुद्रास्फीति (खाद्य, ईंधन और प्रकाश की महंगाई दर को छोड़कर) फरवरी में बढ़कर 5.6 प्रतिशत रही जो जनवरी में 5.3 प्रतिशत थी।
उसने कहा कि भारत में मुद्रास्फीति काफी ऊंची है। उसने अपनी रिपोर्ट में कहा कि एशिया के ज्यादातर देशों में मुद्रास्फीति नरम है और तेल के दाम में वृद्धि तथा अर्थव्यवस्था को धीरे-धीरे खोले जाने से 2021 में इसमें तेजी की आशंका है। इस साल वैश्विक मानिक ब्रेंट कच्चा तेल 26 प्रतिशत उछलकर 64 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया है। कोविड-19 संकट जब अपने चरम के करीब था, यह मार्च 2020 में 30 डॉलर प्रति बैरल था।

