उत्तर प्रदेश सरकार ने तेजी से बढ़ते कोरोना संक्रमण को देखते हुए सख्त कदम उठाए हैं। अब देखना है कि आम जनता को संक्रमण से बचाने के लिए ये तमाम सख्तियां पंचायत चुनावों में लागू होती हैं या नहीं। यदि इन चुनावों में एहतियात नहीं बरती गई, नियम-कानूनों को नजरअंदाज किया गया, रैलियों और सभाओं में भीड़ इकट्ठा हुई, कोरोना प्रोटोकॉल का पालन नहीं हुआ तो इसका नतीजा भयावह हो सकता है। और यदि योगी सरकार सख्त नियम कानून और पूरे अनुशासन/एहतियातों के साथ पंचायत चुनाव करवाने में सफल हो गई तो ये काबिलेतारीफ मिसाल बनेगी।
रोज़ एक हज़ार से भी आगे बढ़ती लखनऊ में कोरोना मरीज़ों की संख्या बता रही है कि पूरे यूपी की क्या स्थिति होगी। अंदाजा लगाइए कि जहां जांच की समुचित व्यस्था तक नहीं हो उन गांव-देहातों में क्या हाल होंगे !
इस हालात में पंचायत चुनाव किस तरह होंगे इसकी कल्पना भी नहीं की जा रही है।
लखनऊ यूपी में तेजी से फैलते कोरोना संक्रमण का पैमाना बन गया है। राजधानी होने के नाते यहा स्वास्थ्य सेवाएं और संसाधन मोहय्या हैं और लोगों में जागरुकता भी है। इस वजह से खूब जांचे हो रही हैं। लेकिन गांव में जहां शहरों की अपेक्षा जागरुकता भी कम है और टेस्ट भी उतने नहीं हो पा रहे होंगे जितने टेस्ट राजधानी लखनऊ मे हो रहे हैं। लेकिन लखनऊ में बढते संक्रमण से अंदाजा लगाया जा सकता है कि ग्रामीण क्षेत्रों में भी ये खतरनाक वायरस का फैलाव बढ़ रहा होगा।
अब देखना है कि योगी सरकार ने कोरोना से बचाव के लिए जो सख्तियां लागे की हैं यदि ऐसे ही सख्त कदम पंचायत चुनाव मे भी लागे हों तो ये क़ाबिले तारीफ कदम होगा। कोरोना के दौरान कोरोना से बचाव की एहतियातों के साथ यूपी के ग्रामीण क्षेत्रों का ये चुनाव देश के सामने नज़ीर बनेगा।
- नवेद शिकोह

