Facts About Mussoorie: पहाड़ो की रानी मसूरी की खूबसूरती के बीच है एक डरावना सच

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देहरादून । यूँ तों देवभूमि उत्तराखंड  में पहाड़ो की रानी कही जाने वाली मंसूरी अपनी प्राकृतिक खूबसूरती और शांत वातावरण के लिए विश्वभर में प्रसिद्ध है लेकिन हर दिल अजीज मसूरी की खूबसूरती में भुताह जगह भी है. जिसका डरावना सच जुड़ा हुआ है पचास हजार मजूदरों की मौत से और उन मरे हुए लोगों की आज भी सुनाई देने वाली आवाजों से. हम बात कर रहे है मसूरी की “लांबी देहर खदान” की जिसे लोग मसूरी के हॉन्टेड प्लेस के नाम से भी जानते है.

आप ने उत्तराखंड के मसूरी की शांत वादियों में कई बार आंनद लिया होगा. लेकिन आज हम आपको मसूरी की खूबसूरत वादियों के बसे भूतिया जगह के बारे में बताते है. मसूरी माल रोड से करीब दस किलोमीटर आगे पड़ने वाली इस जगह को लोग लांबी देहर खदान कहते है. बताया जाता है कि इस जगह में आज  भी मरे हुए लोगों की आवाजे सुनाई देती है. यही नहीं स्थानीय लोग कहते है की यँहा मरे मजदूरों की आत्मा आज भी वंहा भटक रही है. जिनकी आवाजे अक्सर रात को सुनाई देती है. मना तो यह भी जाता है की इन भटकती हुई आत्माओं की वजह से ही  यहाँ कई बार भयानक सड़क हादसे भी होते है.

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 लांबी देहर खदान का राज 

पीछे कई ऐसे राज दफन है जो यहां कि शांत वादियों में खलल डालने का काम करती है। जी हां आज हम आपको उत्तराखंड के इतिहास से जुड़े कुछ काले पन्ने के बारे में बताएंगे जिसको जानकर आपकी रूह भी कांप उठेगी. दुनियाभर के सैलानियों को अपनी ओर आकर्षित करने वाली मसूरी जितनी खूबसूरत है उतना ही रूह कंपा देने वाली लांबी देहर माईन का इतिहास भी है. माना जाता है की नब्बे के दशक में इस माईन में हजारों मजदूर काम करते थे। चूने की इस माइन में ऐसी घटना घटी जिसने न केवल वहाँ काम कर रहे मजदूरों को प्रभावित किया बल्कि देश की बड़ी घटनाओ में इस घटना को माना जाता है. उस समय यंहा काम कर रहे मजदूर फेफड़ो की बीमारी सेग्रसित हो गए. फिर खून की उल्टियों के साथ ही मजदूरों ने दम तोड़ दिया. माना यह जाता है की इस घटना में करीब पचास हजार मजदूरों ने अपनी जान गंवाई थी. जिसके बाद यह माईन पूरी तरह से बंद हो गई और आज के समय में इस खदान को मजदूरों की भटकती आत्माओं का स्थान कहा जाने लगा.

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 आज भी है वीरान 

जिस जगह पर कभी मजदूरों की  चहल पहल हुआ करती थी आज उसी जगह पर लोग रात के समय में जानें से भी डरते है. अपने आप की अलग तरह की घटना होने के बाद से ये खदान बंद पड़ी हुई थी। स्थानीय लोग मानते है कि सालों से बंद पड़ी यह खदान आज भूत-प्रेतों का अड्डा बन चुकी है। यंहा अँधेरा होते ही अजीबो-गरीब आवाजों का सिलसिला शुरू हो जाता है। लोग मानते है कि शाम के समय यहां उन मजदूरों की आत्माएं भटकती है जिन्होंने तड़प-तड़पकर अपनी जान दी थी.यही वजह है की कोई भी स्थानीय व्यक्ति शाम के बाद यँहा नहीं आता. अपनेआप में अलग तरह की इस रहस्यमई गुत्थी को सुलझाने के लिए  ‘इंडियन पैरानॉर्मल सोसाइटी’ की टीम भारतीय मीडिया के साथ आ चुकी है. जिन्होंने यह माना कि यहां नेगेटिव एनर्जी है.

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