मेरठ। इस तिथि पर चुप रहकर अर्थात मौन धारण करके मुनियों के समान आचरण करते हुए स्नान करने के विशेष महत्व के कारण ही माघ मास के कृष्णपक्ष की अमावश्या तिथि मौनी अमावश्या कहलाती है। माघ मास में गोचर करते हुए भुवन भास्कर भगवान सूर्य जब चन्द्रमा के साथ मकर राशि पर आसीन होते है तो ज्योतिष शास्त्र में उस काल को मौनी अमावस्या कहा जाता है। इस वर्ष मकर राशि में बन रहा है चतुष्ग्रही योग और दो बाप बेटों के अद्भुत एवं सुन्दर संयोग बन रहा है। वैसे तो जब सूर्य और चन्द्रमा का एक साथ गोचरीय संचरण शनि देव की राशि मकर में होता है तब उस महत्वपूर्ण पुण्य तिथि को मौनी अमावस्या कहा जाता है। पंडित अनिल शास्त्री के अनुसार आज 31 दिसंबर को जहाँ सूर्य पुत्र शनि देव स्वगृही होकर मकर राशि में गोचर कर रहे है,वहीं चन्द्रमा भी अपने पुत्र बुध के साथ बुधादित्य योग का निर्माण करके मकर राशि में गोचर करते हुए इस दिन की शुभता को बढ़ाने वाले है।
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वर्ष के अति महत्वपूर्ण तिथियों में अपना परम् पुण्यदायक महत्व स्थापित करने वाले मौनी अमावस्या में स्नान,दान ,पूजा और पितृ तर्पण का विशेष महत्व होता है। वैसे तो अमावस्या तिथि का आरम्भ आज 31 जनवरी 2022 दिन सोमवार को दोपहर 1 बजकर 15 मिनट से ही आरम्भ हो जाएगी। जिससे श्राद्ध के लिए 31 को ही प्राप्त हो रही है। परन्तु उदय कालिक महत्व के कारण स्नान, दान एवं मौनी अमावश्या 1 फरबरी दिन मंगलवार को होगी। मंगलवार के दिन अमावस्या पड़ने के कारण इसे भौमवती अमावस्या भी कहा जा सकता है। भौमवती अमावस्या का मणि-कांचन योग गंगा -स्नान के महत्व को कई गुना बढ़ाने वाला होगा। वहीं मौनी अमावस्या के दिन पितृगण पितृलोक से आशा करते है और इस तरह देव और का इस दिन संगम होता है। इस दिन किया गया जप , तप , ध्यान ,स्नान , दान ,यज्ञ , हवन कई गुना फल देता है।

