Pitru Paksha 2022: श्राद्ध पक्ष के समय इस कारण से नहीं किए जाते हैं कोई भी शुभ कार्य

धर्मPitru Paksha 2022: श्राद्ध पक्ष के समय इस कारण से नहीं किए...

Date:

श्राद्ध पितरों के प्रति सच्ची श्रद्धा का प्रतीक माना जाता हैं। सनातन धर्मानुसार प्रत्येक शुभ कार्य के आरंभ से पहले में मां-बाप तथा पितृगण को प्रणाम करना हमारा कर्तव्य है। पुरखों की वंश परंपरा के कारण हम आज जीवित रहे हैं। सनातन धर्म के अनुसार ऋषिमुनियों ने हिंदू वर्ष के 24 पक्षों में से एक पक्ष को पितृपक्ष अर्थात श्राद्धपक्ष का नाम दिया है। पितृपक्ष में पितृगण का श्राद्धकर्म, अध्र्य, तर्पणतथा पिण्डदान के माध्यम से विशेष क्रिया संपन्न करते हैं। धर्मानुसार पितृगण की आत्मा को मुक्ति, शांति प्रदान करने के लिए विशिष्ट कर्मकाण्ड को ही श्राद्ध कहते हैं। श्राद्धपक्ष में शुभकार्य वर्जित क्यों हैं! संस्कृति में श्राद्ध का संबंध हमारे पूर्वजों की मृत्यु की तिथि से है। अतः श्राद्धपक्ष में शुभ तथा नए कार्यों के प्रारंभ अशुभ काल माना गया है। जिस प्रकार किसी परिजन की मृत्यु के बाद शोकाकुल अवधि में रहते हैं। शुभ, नियमित, मंगल, व्यावसायिक कार्यों को एक समय अविधि के लिए रोक देते हैं। उसी प्रकार पितृपक्ष में शुभ कार्यों पर रोक लग जाती है। श्राद्धपक्ष 16 दिनों की समय अवधि में पितृगण से तथा हमारे पितृगण हमसे जुड़े रहते हैं। अतः शुभ-मांगलिक कार्यों को वंचित रखकर पितृगण के प्रति पूरा सम्मान व एकाग्रता बनाए रखते हैं। मनुष्य योनी में जन्म लेते पर व्यक्ति पर तीन प्रकार के ऋण समाहित होते हैं। इन तीन प्रकार के ऋणों में एक ऋण है पितृऋण धर्मशास्त्रों में पितृपक्ष में श्राद्धकर्म के अध्र्य, तर्पण, पिण्डदान के माध्यम से पितृऋण से मुक्ति पाने का रास्ता बतलाया है।

पितृऋण से मुक्ति पाए बिना व्यक्ति का कल्याण नहीं होता है।  श्राद्धपक्ष की अवधी में पितृगण पितृलोक से चलकर भूलोक को आ जाते हैं। इन सोलह दिन में पितृलोक पर जल का अभाव हो जाता है। अतः पितृपक्ष में पितृगण भूलोक आकार अपने वंशजो से तर्पण करवाकर तृप्त होते हैं। विचारणीय विषय है कि जब व्यक्ति पर ऋण अर्थात कर्जा हो तो वो खुशी मनाकर शुभकार्य कैसे कर सकता है। पितृऋण के कारण पितृपक्ष में शुभकार्य नहीं किए जाते। पितृऋण से मुक्तिः शास्त्र कहते हैं कि पितृऋण से मुक्ति के लिए श्राद्ध से बढ़कर कोई कर्म नहीं होता है। श्राद्धकर्म का अश्विन मास के कृष्ण पक्ष में सर्वाधिक महत्व है। इस समय सूर्य पृथ्वी के नजदीक होता हैं। जिससे पृथ्वी पर पितृगण का प्रभाव पड़ता है इसलिए पितृपक्ष में कर्म को महत्वपूर्ण माना है।

Share post:

Subscribe

Popular

More like this
Related