बाजार:- लम्बे समय से जहां सभी को जीडीपी के नतीजों का इंतजार था वही अब आज वित्त वर्ष की अंतिम तिमाही जीडीपी के आंकड़े जारी कर दिए गए हैं। सांख्यिकी मंत्रालय द्वारा जारी आकड़े के अनुसार जीडीपी में जनवरी-मार्च की अवधि में जीडीपी में 4.1 फीसदी की वृद्धि हुई। अगर हम बात अक्टूबर-दिसंबर तिमाही के दौरान की करें तो उस समय भारत की जीडीपी में 5.4 फीसदी की वृद्धि हुई थी।
वित्त वर्ष 2021 से 2022 तक के जीडीपी की ग्रोथ 8.7 फीसदी रही है। यह आंकड़ा उस 28 फरवरी को जारी हुआ था उस समय पूरा देश कोरोना के तहिमाम से परेशान था। विशेषज्ञों का कहना है कि देश मे मचे कोविड तांडव और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर हुए रूस और यूक्रेन के युद्द ने जीडीपी ग्रोथ को प्रभावित किया है और यह मंद गति से चली है।
यूक्रेन-रूस के कारण भारत समेत ग्लोबली इकोनॉमी पर भयंकर असर पड़ा है। इस जंग के बाद बदले माहौल में खपत से लेकर आपूर्ति तक प्रभावित हुआ है। इसका स्वाभाविक असर मार्च तिमाही के आंकड़ों पर दिखा है।
वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार मार्च और अप्रैल में इकोनॉमिक ग्रोथ 8.4 फीसदीं रही है। वही अगर हम बात अप्रैल 2022 में कोयला, बिजली, रिफाइनरी उत्पाद, उर्वरक, सीमेंट और प्राकृतिक गैस उद्योगों की करे तो इस वर्ष इसका उतपादन पिछले वर्ष की तुलना में बढ़ा है। बता दें कोर सेक्टर में आठ प्रमुख क्षेत्र – कोयला, कच्चा तेल, प्राकृतिक गैस, रिफाइनरी उत्पाद, उर्वरक, इस्पात, सीमेंट और बिजली हैं।
जीडीपी के आंकड़े जारी होने के बाद विशेषज्ञ ने चिंता जाहिर की है उन्होंने कहा है कि अभी लोगो को सतर्क रहने की आवश्यकता है। वही तेल और डीजल के दामो में एक बार पुनः उछाल देखा जा सकता है वही आगामी तीन दिनों तक बाजार का स्तर डॉउन रह सकता है।

