बाजार:- स्टार्टअप के मामले में भारत दुनिया के शीर्ष देशो के साथ कदम से कदम मिलाकर चल रहा है भारत मे 10 दिन पर एक स्टार्टअप यूनिकॉर्न बन जाता है। यानी जिसकी पूंजी 7600 करोड़ से अधिक हो जाती है। लेकिन बात वही अटकती है रोजगार पर क्योंकि यह रोजगार देने के मामले में एक दम पीछे खड़ा है।
सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार पिछले पांच साल में भारत मे 100 यूनिकॉर्न मिलकर टीसीएस के मुकाबले आधे भी रोजगार नहीं उतपन्न कर पाए हैं। वही अब इनमें जिनको रोजगार प्राप्त हुआ है उनकी छटनी भी आरम्भ हो गई है जो की वास्तव में काफी चिंता का विषय है। अगर हम सबसे अधिक स्टार्टअप की बात करें तो वित्त और शिक्षा क्षेत्र में सबसे अधिक स्टार्टअप हैं, लेकिन केवल शिक्षा क्षेत्र के स्टार्टअप (एडुटेक) ही बेहतर कर पा रहे हैं।
सूत्रों के अनुसार वैश्विक बाजार में मची उथल पुथल और कोरोना के चलते डगमगाई अर्थव्यवस्था के कारण स्टार्टअप कम्पनियों को पैसा जुटाने में काफी समस्या हो रही है। जब वह नई पूंजी नहीं जुटा पा रहे हैं तो वह अपने कर्मियों की छटनी का विकल्प अपना रहे हैं। वही आगमी समय मे स्टार्टअप कम्पनियों के लिए काफी समस्याएं होने वाली है क्योंकि सरकार ने अब 10 से अधिक कर्मचारियों वाली कंपनी को ईपीएफओ में रजिस्ट्रेशन करवाना अनिवार्य कर दिया है।
जानकारी के लिए बता दें जो स्टार्टअप कंपनी है उनका शुरुआती बेतन बेहद उम्दा है वही जो कम्पनियां लोगो को हायर करती है वह उन्हें सामाजिक सुविधाएं नहीं दे पाती है। देश में 100 यूनिकार्न की कुल नौकरियों में केवल 10 फीसदी ईपीएफओ में पंजीकृत हैं। देश में 100 स्टार्टअप ने कुल मिलाकर अभी तक केवल 28 लाख रोजगार दिया है, जिसमें केवल 2.72 लाख ईपीएफओ में पंजीकृत हैं.
जबकि देश की सबसे बड़ी आईटी कंपनी टीसीएस के कर्मचारियों की संख्या 5.92 लाख है और सभी ईपीएफओ में पंजीकृत हैं। टीसीएस ने पिछले साल एक लाख से अधिक लोगों को रोजगार दिया। वहीं जौमैटो के साथ 3.16 लाख डिलीवरी पार्टनर जुड़े हुए हैं।
जानकारी के लिए बता दें यूनिकार्न स्टार्टअप में शिक्षा क्षेत्र से जुड़े बॉयजू ने सबसे अधिक 58 हजार रोजगार डिल्वीवेरी ने करीब 20 हजार रोजगार, पीटीएम, पॉलिसी बाजार, फ्लिपकार्ट, जोहो आदि प्रत्येक ने 10 हजार से अधिक रोजगार दिये है। इसी तरह रिवल फूड्स, फाइव स्टार,अनएकेडमी और नोब्रकोकर ने पांच से 10 हजार के करीब रोजगार दिये हैं।

