64 साल बाद बनारस को मिली उसकी पुरानी पहचान

उत्तर प्रदेश64 साल बाद बनारस को मिली उसकी पुरानी पहचान

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64 साल बाद बनारस को मिली उसकी पुरानी पहचान

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ Yogi Adityanath और जम्मू कश्मीर के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा (Manoj Sinha) की मेहनत आखिरकार रंग लाई उन्होंने मंडुवाडीह स्टेशन को बनारस स्टेशन के नामांतरण के लिए जो रेलवे बोर्ड को प्रस्ताव भेजा था अब उसे अंतिम स्वीकृति मिल गई है, जिसके बाद पूर्वोत्तर रेलवे ने मंडुवाडीह स्टेशन का नाम बदलकर बनारस Banaras रख दिया है और अब बोर्ड से लेकर टिकटों पर हर जगह आपको यही नाम लिखा मिलेगा | 

जैसा की काशी के विद्वानों (Scholars) ने मांग की थी कि स्टेशन के बोर्ड पर नाम संस्कृत में भी अंकित किया जाए. बोर्ड ने उनकी यह मांग मान ली है और अब बोर्ड पर नाम संस्कृत में अंकित किया जा रहा है..आज यानि (15 जुलाई 2021) से जो टिकट वितरित किये जा रहे हैं, उस पर भी आपको बनारस ही लिखा मिलेगा . हम आपको बताना चाहेंगे की वर्ष 2020 के सितंबर में राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने मंडुवाडीह स्टेशन का नाम बदलकर बनारस किए जाने की अनुमति दी थी. पूर्वोत्तर रेलवे के जनसंपर्क अधिकारी ने बताया कि रेलवे बोर्ड से नाम बदलने की अनुमति मिलने के बाद काम तेजी शुरू कर दिया गया है जिसके बाद स्टेशन के प्रमुख द्वार के साथ-साथ पूरे स्टेशन प्रांगण में और ऑनलॉइन भी स्टेशन के नाम में बदलाव किया जा रहा है | 

बता दें कि, बनारस को अपना नाम करीब 64 वर्षों के बाद मिला है इससे पहले वाराणसी कैंट (Varanasi) स्टेशन बनारस कैंट के नाम से जाना जाता था लेकिन उत्तर प्रदेश के दूसरे मुख्यमंत्री संपूर्णानंद जी ने इसे बदलकर वाराणसी कैंट रख दिया था

बनारस स्टेशन पर मिलेंगी ये खास सुविधाएं

बनारस स्टेशन अत्याधुनिक सुविधाओं से लैस होगा। स्टेशन परिसर में वेटिंग रूम एरिया की व्यवस्था दी गई है, हर श्रेणी के लिए एक अलग वेटिंग रूम है. वीआईपी लाउंज, एस्केलेटर, कैफेटेरिया, लिफ्ट, फूड प्लाजा व् पार्किंग, की सुविधा भी उपलब्ध है स्टेशन पर एक सेल्फी पॉइंट भी बनाया गया है जोकि जनता को अपनी तरफ आकर्षित करेगा. धरोहर के तौर पर छोटी लाइन में एक राष्ट्रीय ध्वज और इंजन भी रखा गया है. मॉडर्न बुकिंग और रिजर्वेशन ऑफिस भी दिया गया है | 

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